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खुल्ला बारणा – साकी / एच. एच. मनरो अनु – राजेन्द्र सिंह

साकी’ प्रसिद्ध अंग्रेज लेखक एच. एच. मनरो का उपनाम है जिनका जन्म 1870 में ब्रिटिश बर्मा में हुआ।  13 नवम्बर 1916 को फ़्रांसिसी जमीन पर जर्मन सेना से लड़ते हुये युद्ध के मैदान में इनका देहान्त हुआ। कहानी के क्षेत्र में इनको वैश्विक स्तर पर उस्ताद का दर्जा हासिल है। द इंटरलोपर, द ओपन विण्डो, द टॉयज़ ऑफ़ पीस, द बुल, द ईस्ट विंग आदि इनकी अनेक कालजयी कहानियां हैं।  इस अंक में प्रस्तुत है साकी उर्फ़ एच. एच. मनरो की विश्व प्रसिद्ध कहानी  ‘The Open Window’  का  हरियाणवी अनुवाद। अनुवाद किया है राजेंद्र सिंह ने, जो राजकीय महाविद्यालय, गुड़गांव में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर हैं।

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कसूरवार – अंतोन चेखव

अंतोन चेखव की मैलइफेक्टर का हरयाणवी अनुवाद। जिसमें 19 वीं सदी के रूसी किसान के भोलेपन एवं उसकी दुर्दशा का वर्णन के साथ असवेंदनशील न्याय व्यवस्था के क्रियाकलापों पर करारा व्यंग्य है। – सं.

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लेणे के देणे – चिनवा अचेबे

चिनवा अचेबे की रचनाओं ने विश्व के साहित्य के लेखन, अध्ययन व अध्यापन को प्रभावित किया है। प्रस्तुत कहानी अचेबे की कलम से निकली एक इग्बो लोक कथा का हरियाणवी अनुवाद है जिसको ‘थिंग्स फॉल अपार्ट’ से लिया गया है। इसमें चालाक कछुए और भोले-भाले पक्षियों के माध्यम से चालाक लोग वाक्चातुर्य से किस तरह से सीधे-सादे लोगों को ठगते व शोषण करते हैं इसको उदघाटित करने की कोशिश की और लोग किस तरह से प्रतिरोध प्रकट करते हैं – सं.

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किरेळिया – अंटोन चेखव

विश्व प्रसिद्ध रुसी कहानीकार अंटोन चेखव ने अपनी प्रसिद्ध कहानी गिरगिट में शासन-प्रशासन  में फैला भ्रष्टाचार, जनता के प्रति बेरुखी और अफसरशाही की चापलूसी को उकेरा है। भारतीय संदर्भों में भी प्रासंगिक है। प्रस्तुत है इस कहानी का राजेंद्र सिंह द्वारा हरियाणवी अनुवाद। सं.