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जनवादी कविता की विरासत-डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 1,442 आलेख हिन्दी में आठवें दशक के दौरान जनवादी कविता का स्वर ही प्रमुख रहा है, कई नए हस्ताक्षर इधर जनवादी कविता के क्षेत्र में उभर कर आए…

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साहित्य और राजनीति के अंत:सम्बन्ध – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 390 आलेख साहित्य और राजनिति में जो फर्क है, वह तो ई. एम. एस. ने स्पष्ट कर ही दिया है कि राजनीति में ”अपनी सत्ता को बनाये रखने…

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कविता की भाषा और जनभाषा – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 231 आलेख कविता की भाषा का जन-भाषा से किस प्रकार का सम्बन्ध हो इस प्रश्न पर हम यहां केवल जनवादी कविता के संदर्भ में ही विचार करेंगे। कविता…

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साहित्य और विचारधारा -डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 845 आलेख मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र का यह एक मुख्य कर्तव्य है कि प्रतिक्रियावादी बुर्जुआ चिन्तकों द्वारा साहित्य के बारे में जो अवैज्ञानिक और भ्रान्तिपूर्ण धारणाएं प्रचलित एवं प्रस्थापित की…

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जनवादी कविता की पहचान – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 240 आलेख हिन्दी में जनवादी कविता का जो नया उभार सन् 1970 के आसपास दिखाई देने लगा था, उसका सही स्वरूप अब निखर कर सामने आने लगा है।…

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बौद्धिक साहस और कल्पना की उदात्त तीव्रता का स्वर आबिद आलमी – – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधिची

Post Views: 598 ओम प्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधीचि आबिद आलमी के ग़ज़ल-संग्रह ‘नये ज़ाविए’ का मुख्य स्वर सीधी टकराहट का, जोखिम उठाने का है। आबिद आलमी के लिए सृजनात्मकता…