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अधबने फूल की हिमायत में – कुलदीप कुणाल

Post Views: 178  कविता अधबने फूल की हिमायत में उस स्कूल में बहुत से चित्र थे एक बच्चा चिंतित था क्यूंकि होमवर्क पूरा नहीं था एक बच्चे को ज़ोर की…

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डिजिटल चावल – कुलदीप कुणाल

Post Views: 121 कविता डिजिटल चावल और चींटी चावल का दाना छोड़ कर चली गयी, और इस तरह से चावल का वो दाना सुदामा के हाथों कृष्ण को नसीब हुआ।…

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बीस बरस की लड़की – कुलदीप कुणाल

Post Views: 169 कविता बीस बरस की लड़की अब हो गयी तुम पूरे बीस बरस की लड़की ये उम्र है किसी का कहा ना मानने की अपनी कहने की, करने…

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सभ्यता के गुमान में – कुलदीप कुणाल

Post Views: 489 कविता सभ्यता के गुमान में सदियों पहले जब आदिमानव बिना कपड़ों के जीता था तब भी उसे एक मादा ने पैदा किया था। अपने शरीर में धारण…

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आइये देखें – कुलदीप कुणाल

Post Views: 138 कविता आइये देखें आइये देखें रोज़-रोज़ गिरावट की नित-नयी किस्में.. नाचती हुई नायिका के थिरकते हुए नितम्ब.. और नायक का निगेटिव शेड, हंसोकड़ी.. अवसर की चौपड़ सजाते…

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विदाई समारोह – कुलदीप कुणाल

Post Views: 538 कविता विदाई समारोह एक विदाई समारोह देखा। निबटारा देखा। रिश्तों का पिछवाड़ा देखा। कुछ आंसू थे, बेखुशबू के फूल बिछे थे- पर जाते-जाते जाने वाले ने मुड़कर…

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सच के हक़ में – कुलदीप कुणाल

Post Views: 554 कविता सच के हक़ में तुम जानते हो कि तुम दिमाग़ को मार नहीं सकते। तुम जानते हो कि एक दिन तुम्हारी बेशर्मी भी तुम्हारे किसी काम…

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वर्जीनिया को पढ़ते हुए – कुलदीप कुणाल

Post Views: 109 कविता वर्जीनिया को पढ़ते हुए एक अदद कमरे की ज़रूरत है एक प्याली कॉफ़ी जहां हो एक प्याली कॉफ़ी और कुछ किताबें कुछ देर का बेबाक लेटना…

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आती रहेंगीं बेटियां – कुलदीप कुणाल

Post Views: 490 कविता आती रहेंगीं बेटियां जीवन निरंतर चलता रहे ये उसूल कुदरत ने बनाया था और हमने वो उसूल तोड़ दिया। फिर कुछ यूं हुआ की हमने कुदरत…