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तुम कबीर न बनना- हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 584     कविता जब मेरे दोस्त मुझे कबीर बना रहे थे मैं प्यादों की ताकत से ऊंटों की शह मात बचा रहा था घोड़े दौड़ा रहा था…

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प्रतिकर्म -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 442 कविता मुझे मत कहना गर मैं कविता करते-करते शब्दों की जुगाली करने लगूं और सभ्य भाषा बोलते-बोलते बौराये शराबी की तरह चिल्लाने लगूं बेइखलाकी पर उतर जाऊं…

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कहा था न -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 680 कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज…

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वैश्वीकरण -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 494 कविता मैं खौफनाक चाबुकधारी नहीं कांप जाओगे जिससे। मैं पुष्प अणु हूं तुम्हारी सांसों तुम्हारे लहु में समा जाऊंगा मस्तिष्क पर बैठ करके सम्मोहित कर दूंगा मदहोश।…

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सीढ़ी -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 485 कविता मनुष्य जीवनभर तलाशता है सीढ़ी ताकि छू सके कोई ऊंची चोटी एक ऊंचाई के बाद तलाशता है दूसरी सीढ़ी औ’ हर ऊंचाई के बाद नकारता है…

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बनवास -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 476 कविता वनों की ओर जाना ही नहीं होता बनवास जब भी अकेलापन करता है उदास ख्यालों के कुरंग नाचते हैं चुप्पी देती है ताल उल्लू चीखते हैं…

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बाबा पूछेगा -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 536 कविता गली-बाजारों में/निकलती है भीड़ कभी इस ओर से कभी दूसरे छोर से हाथों में बर्छे लिए और त्रिशूल उठाए- ‘अकाल’ ‘हरहर’ महादेव के जयकारों से कांपती…

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सांझा लंगर -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 527 कविता   आओ मेरे लाल मेरी आंखों के तारो! मैं अब तुम्हारी भूख तुम्हारी रुलाई सहन नहीं कर सकती लो यह रस्सी गर्दन में डालकर झूल जाओ…

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राम-बाण -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 475 कविता यह आपकी पहली जीत थी। आपने ढूंढ लिया मेरा विभीषण जैसा भाई। यह मेरी आखिरी हार थी आपने जान लिया मेरे भीतर का रहस्य। नाभि का…

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ठीक कहा तुमने -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 508 कविता तुमने ठीक ही कहा है- जब हम तोड़ नहीं पाते अपने इर्द-गिर्द की अदृश्य रस्सियों के अटूट जाल, तब हम दार्शनिक हो जाते हैं। कहीं एकांत…