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कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक ले – धनपत सिंह

कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक लेरै मेरी इसी पढ़ाई नैं कौण लिखणियां लिख ले इतणै भूक्खा मरणा हो इतणै वा झाल मिलै नागुमसुम रहैगा बंदा इतणै ख्याल…

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मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवार – धनपत सिंह

मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवारदुनियां के म्हं बड़ा बताया पगड़ी बदला यार किरसन और सुदामा यारी लाए सुणे होंएक ब्राह्मण और एक हीर कै जाए सुणे होंएक…

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हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैं – धनपत सिंह

हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैंचाक घुमावै बास्सण तारै वोहे लोग कुम्हार हो सैं क्यूं लागी मनैं विसवासण, हम घड़ते माट्टी के बास्सणतांबे और पीतळ के कास्सण हर…

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पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशी – धनपत सिंह

पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशीहीरामल तैं पहल्यां मनैं टुटणा है फांसी पाक मोहब्बत दुनियां के म्हं सबतैं बड़ी करारी हो सैफेर जी के लेणा हो सै जब अलग…

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मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सास – धनपत सिंह

मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सासदिन रैन चैन नहीं पिया बिना, छ: ऋत बारहा मास चैत चाहता चित चोर को चले गए चतर सुजानचित के…

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तुम जाओ सुसरा सास – धनपत सिंह

तुम जाओ सुसरा सास,समझा ल्यूंगी जब आज्यागा मेरे पास मेरे बुझे ताझे बिना कित भरतार जावैगामेरा वो गुनाहगार क्यूकर तजकै नार जावैगाधमका द्यूंगी करड़ी हो कै क्यूकर बाहर जावैगाहो मनैं…

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सात जणी का हे माँ मेरी झूमका – धनपत सिंह

सात जणी का हे माँ मेरी झूमका, हेरी कोए रळ मिल झूलण जा,झूल घली सै हे मां बाग म्हं कोए-कोए किसे की बाट म्हं ठहर रही रीकोए तीळ सिंधारे आळी…

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किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसान – धनपत सिंह

किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसानलूट-खसोट मचावणियां तूं के जाणै बेईमान माह, पोह के पाळे म्हं भी लाणा पाणी होदिन रात रहे जा बंध पै कस्सी बजाणी होगिरड़ी फेरां,…