Author Archives: Prof. Subhash Chander

जंगली कौन

विनोद सिल्ला कितना भाग्यशाली था आदिमानव तब न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा था हिन्दू-मुसलमान का न कोई झगड़ा था छूत-अछूत का न कोई मसला था अभावग्रस्त जीवन चाहे लाख मजबूर था पर धरने-प्रदर्शनों से कोसों दूर था कन्या भ्रूण-हत्या का पाप नहीं था किसी ईश्वर-अल्लाह का जाप नहीं था न भेदभावकारी वर्ण-व्यवस्था थी मानव जीवन की वो मूल

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भैत्तर हजार की भोड़िया

 डा. नवरत्न पांडे                 भैत्तर हजार की भोड़िया के साथ गांव की साधारण भोड़िया की कहा सुनी हो गयी। बात कहासुनी से शुरू होकर पिलमा पछाड़ी तक पहुँच गयी। एक बुजुर्ग ने दोनों को अलग-अलग कर दिया। फिर दोनों लगी एक दूसरी को कोसने, गालियां देने …. लेकिन गालियां भैत्तर हजार की भोड़िया को भी आती हैं, वह बराबर गालियां

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मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   मुनाजात-ए-बेवा (1884) ए सब से अव्वल1 और आखिर2 जहाँ-तहाँ हाजि़र और नाजि़र3 ए सब दानाओं से दाना4 सारे तवानाओं से तवाना5 ए बाला हर बाला6 तर से चाँद से सूरज से अम्बर से ए समझे बूझे बिन सूझे जाने पहचाने बिन बूझे सब से अनोखे सब से निराले आँख से ओझल दिल के उजाले ए

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अंतहीन संकट

डा. महावीर शर्मा 1929-30 में अमरीका में महामंदी का संकट आया, जिसमें बड़े-बड़े बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान दिवालिया हो गए। दुनिया के शेयर बाजारों में अफरा-तफरी फैल गई। इसका व्यापक असर यूरोप व अन्य देशों पर भी पड़ा। यह महामंदी द्वितीय विश्व युद्ध तक जारी रही। अमरीकन सरकार की ‘न्यू डील’ भी इसका असर दूर करने में असफल रही।

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