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शाहीन बाग़ के प्रकाशपुंज – स्वराजबीर – अनु. – जगजीत विर्क

गुरु गोबिन्द सिंह की अगुवाई में सिखों ने चमकौर की गढ़ी और नारनौल के सतनामियों ने नारनौल इलाके की कच्ची गढ़ियों में से हाकिमों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। उन गढ़ियों में से उठे संघर्ष कामयाब हुए और लाल किले में बैठे हाकिमों को हार का मुंह देखना पड़ा। ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना अपने आप में मानवता की जीत है। जम्हूरियत के लिए हो रहे संघर्षों की खुशबू बसी हुई है और खुशबू को कत्ल नहीं किया जा सकता।

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जीवन के विविध रंगों जीवन-दृष्टि देता रंगमंच – अरुण कुमार कैहरबा

थियेटर या रंगमंच जीवन के विविध रंगों को मंच पर प्रस्तुत करने की जीवंत विधा है। रंगमंच सही गलत के भेद को बारीकी से चित्रित करता है। रंगमंच सवाल खड़े करता है। रंगमंच समाज का आईना ही नहीं है, बल्कि परिवर्तन का सशक्त औजार भी है।

साहित्य की महत्ता – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) हिन्दी के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगप्रवर्तक थे। हिंदी साहित्य की अविस्मरणीय सेवा की और अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा और दृष्टि प्रदान की। 17 वर्ष तक हिन्दी की प्रसिद्ध पत्रिका सरस्वती का सम्पादन किया।

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धर्म में लिपटी वतनपरस्ती क्या-क्या स्वांग रचाएगी – गौहर रज़ा

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन द्वारा 14-15 मार्च को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित हरियाणा सृजन उत्सव में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया।

सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की मुहिम – अरुण कुमार कैहरबा

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रदेश के लेखकों-कवियों ने 29फरवरी व 1मार्च को हरियाणा सृजन यात्रा निकाली। सृजन यात्रा में हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर से जुडऩे की कोशिश के रूप में चार महान साहित्यकारों- शायर अल्ताफ हुसैन हाली, बाबू बालमुकुंद गुप्त, संत कवि गरीबदास और सूफी कवि बाबा फरीद से जुड़े क्रमश: पानीपत, रेवाड़ी जिले के गांव गुडिय़ानी, झज्झर जिला के गांव छुड़ानी व हांसी में स्थित स्थानों का भ्रमण किया गया।

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बराबरी की मांग करता है रविदास का साहित्य – डॉ. सुभाष चन्द्र

Post Views: 135 गुरू रविदास की जयंती के अवसर पर देस हरियाणा पत्रिका और सत्यशोधक फाउंडेशन की ओर से सावित्रीबाई-जोतिबा फुले पुस्तकालय, सैनी समाज भवन, कुरूक्षेत्र में एक विचार गोष्ठी…

मैं हिन्दू, मेरा देश हिंदुस्तान पर यह हिन्दू राष्ट्र न बने – राजेंद्र चौधरी

असली लड़ाई सब के लिए शांति, सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और न्याय की है. रोज़गार की है, सरकारी नौकरी की नहीं अपितु गरिमामय एवं सुरक्षित रोज़गार एवं व्यवसाय की है. और शायद अब तो सब से बड़ी लड़ाई साफ़ हवा और पानी की है. पर हिन्दू राष्ट्र जैसे मुद्दे हमें इन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित ही नहीं करने देते. कभी मंदिर, कभी घरवापसी, कभी लव ज़िहाद इत्यादि मुद्दों पर ही हमारा ध्यान लगा रहता है.

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पंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

लोहड़ी पंजाब के मौसम से जुड़ा ऐसा त्यौहार है, जिसकी अपनी अनुपम विशेषताएं हैं। जैसे यह त्यौहार पौष की अंतिम रात को मनाया जाता है, जबकि भारत के दूसरे भागों में अगले दिन ‘संक्रांति’ मनाई जाती है। इस त्यौहार पर पंजाब के लोग आग जलाते हैं। संक्रांति पर ऐसा नहीं होता, केवल नदियों-सरोवरों में स्नान किया जाता है। लोहड़ी में तिलों और तिलों की रेवड़ियों की आहूति दी जाती है।