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ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूद– आबिद आलमी

Post Views: 148 ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूद तेरी निगाह कहाँ टकराई है दीवाने! तेरे दिमाग़, तेरे ज़हन पर मसलत है हसीन उम्रगेज़ सत्ता के चन्द…

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ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूद – आबिद आलमी

Post Views: 107 ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूद तेरी निगाह कहाँ टकराई है दीवाने! तेरे दिमाग़, तेरे ज़हन पर मसलत है हसीन उम्रगेज़ सत्ता के चन्द…

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जो ख़लाओं में देखता कुछ है – आबिद आलमी

Post Views: 120 जो ख़लाओं में देखता कुछ है। उसको आईने से गिला कुछ है॥ भागे जाते हैं लोग जंगल को, शहर में आज फिर हुआ कुछ है। यूँ बग़ल…

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उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो- आबिद आलमी

Post Views: 173 उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो। मेरी ये ज़िद्द के जो मानी हो मेरा अपना हो॥ ओंठ सिल जाएँ तो आँखों से बयां हो जाए,…

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उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो – आबिद आलमी

Post Views: 93 उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो। मेरी ये ज़िद्द के जो मानी हो मेरा अपना हो॥ ओंठ सिल जाएँ तो आँखों से बयां हो जाए,…

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मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले- आबिद आलमी

Post Views: 109 ग़ज़ल मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले। हों न हों लगते हैं तस्वीर बनाने वाले॥ वक़्त रख देगा तेरी पीठ पे शब का पहाड़। बोझ…

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मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले – आबिद आलमी

Post Views: 145 ग़ज़ल मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले। हों न हों लगते हैं तस्वीर बनाने वाले॥ वक़्त रख देगा तेरी पीठ पे शब का पहाड़। बोझ…

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यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था – आबिद आलमी

Post Views: 116 ग़ज़ल यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था। इक इक क़दम पे हमको मगर डूबना पड़ा॥ पहले तो देर तक वो मुझे घूरता रहा, फिर…

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यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था- आबिद आलमी

Post Views: 123 ग़ज़ल यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था। इक इक क़दम पे हमको मगर डूबना पड़ा॥ पहले तो देर तक वो मुझे घूरता रहा, फिर…