यह साल नया फिर आया है – अविनाश सैनी

अविनाश सैनी
यह साल नया फिर आया है
कुछ उम्मीदों को साथ लिए
खुशियों से भरे कुछ दिन लेकर
नगमों से सजी कुछ रात लिए
यह साल नया फिर आया है
कुछ उम्मीदों को साथ लिए।
कुछ दूरियाँ अब मिट जाएँगी
कुछ दिल टूटे जुड़ जाएँगे
जो वक़्त के हाथों खाए हैं
वे घाव भी कुछ भर जाएँगे
फिर जीने की चाह जागेगी
डर मौत का कम हो जाएगा
यह साल नया फिर आया है
इन उम्मीदों को साथ लिए।
कुछ गीत नए फिर जन्मेंगे
कुछ पैदा होंगे साज़ नए
पहुँचेंगे कुछ अंजाम तलक
और कुछ होंगे आगाज़ नए
फिर जज़्बों की लौ फूटेगी
फिर खुश्क हवा कुछ नम होगी
फिर पास-पास हम आएँगे
कुछ दिलों की नफ़रत कम होगी
फिर हमदम हमराही होंगे
रस्ता आसां हो जाएगा
यह साल नया फिर आया है
इन उम्मीदों को साथ लिए।
एक महक हवा में उट्ठेगी
बारूद की बू मिट जाएगी
यूँ बादल गरजेंगे जिसमें
तोपों की गरज घुल जाएगी
फिर ऐसी बिजली कौंधेगी
ग़म के बादल छँट जाएँगे
फिर ऐसा पानी बरसेगा
खूँ के धब्बे धुल जाएँगे
फिर प्यार की कोंपल फूटेंगी
फिर अम्न के पंछी चेहकेंगे
यह साल नया फिर आया है
इन उम्मीदों को साथ लिए।
यहाँ फिर से कोयल कूकेंगी
आगाज़ बहारों का होगा
कल तक के अंधेरे कोनों पर
फिर राज सितारों का होगा
चेहरे की रंगत लौटेगी
हाथों की ताकत लौटेगी
कदमों में रवानी आएगी
हर दिल पे जवानी छाएगी
फिर आँगन-आँगन दीप जलेंगे
झूम उठेगी गली-गली
जीवन के फिर से फूल खिलेंगे
महक उठेगी कली-कली
फिर सपने देखेंगी आँखें
फिर सपनों में अपने होंगे
यह साल नया फिर आया है
इन उम्मीदों को साथ लिए।।

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