किसान-जसबीर सिंह लाठरों

जसबीर सिंह लाठरों 

दीप नहीं, दिल जलेंगें ख़ाली
फ़सलों की हुई ऐसी बदहाली
खेती जो छोड़ देगा किसान
देश में कैसे रहेगी खुशहाली?

हर तरफ महानगरों में फैला उजाला
किसानों का ही निकला दिवाला
महानगर सजे ज्यों दुल्हन-दूल्हा
गाँवों में किसानों का,ठंडा पड़ा है चूल्हा

व्यापारी वर्ग काला धन जुटाता
विदेशों में जाता और जश्न मनाता
लाचार किसान क़िस्मत को रोता
उम्र-भर सूदख़ोरों का क़र्ज़ ही ढोता

बाज़ारों में दुकानदार लूटते चाँदी
पैसों की उन पर बरसती है आँधी
पर किसानों के खेत पड़े हैं ख़ाली
बिकने लगे हैं उनके,रिपर-रूटावेटर, ट्रैक्टर-ट्राली

मिलावट कर बेचते,नक़ली खोया-मिठाई
मिठाई वाले करते ख़ूब काली कमाई
किसानों की है ये दर्द भरी कहानी
उनके दूध से महँगा, बिके शहरों में पानी

किसानों की भूमि भू-माफ़िया बिकवाता
ज़मीनी सौदे में रोज़ करोड़ों कमाता
कौड़ियों का भाव किसान को जाता
उपजाऊ भूमि पर कॉलोनी कटवाता

देख किसानों की ऐसी बदहाली
जसबीर कहता ये बात निराली
देश के किसान जब होंगें­ खुशहाल
देश में होगी तब असली खुशहाली!!

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