धार्मिकता

अशोक भाटिया 

(लघुकथा के प्रमुख हस्ताक्षर वरिष्ठ साहित्यकार हिंदी कथा साहित्य के आलोचक हैं। तीन दशक से अधिक उच्च शिक्षा में साहित्य का अध्यापन किया। साहित्यिक गतिविधियों से समाज प्रगतिशील मूल्यों की स्थापना के लिए संघर्षरत हैं।)

 

धार्मिकता

जे धार्मिक होता है
वह झूठ नहीं बोलता
जो झूठ बोलता है
वह धार्मिक नहीं होता।

जो धार्मिक होता है
वह हिंसा नहीं करता
जो हिंसा करता है
वह धार्मिक नहीं होता।

जो धार्मिक होता है
वह मन में नफरत नहीं रखता
जो मन में नफरत रखता है
वह धार्मिक नहीं होता।

जो धार्मिक होता है
वह आदमी आदमी में फर्क नहीं करता
जो आदमी आदमी में फर्क करता है
वह धार्मिक नहीं होता।

संपर्क— 94161-52100

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