ए हिन्द-पाक के लोगो – अमृल लाल मदान

अमृतलाल मदान

(पिछले पचासों सालों से साहित्य सृजन में सक्रिय वरिष्ठ साहित्यकार अमृतलाल मदान हरियाणा के कैथल शहर के निवासी हैं। नाटक, कविता, उपन्यास, यात्रा आदि लगभग हर विधा में साहित्य रचना कर रहे हैं। प्रगतिशील मूल्य व चेतना इनके साहित्य का केंद्रीय सूत्र है। सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ निरंतर संघर्ष करते रहे हैं।  – सं।)

ऐ हिन्द-पाक के लोगो
आसान बना लो राहें
सरहद पर आकर दोनों
फैला दो अपनी बाहें।

हम एक ही मां के बच्चे
फिर भी मजबूर हुए क्यों
जाने ये सियासत कैसी
मां-जाये दूर हुए क्यों?
है एक ही खूं की रंगत
है एक सी मीठी बोली
फिर भी ये कौन चलाता
पीठों के पीछे गोली?
कब तक बेवाएं भरेंगी
बहने माताएं भरेंगी
घायली ये हवाएं भरेंगी
ज़िंदा लाशों सी आहें।
ऐ हिन्द-पाक के लोगो…

दीवारें हों यूं नीची
बच्चे भी कूद के  जाएं
गर पेड़ हों इक आंगन में
साये दूजे में छाएं।
बतला दें अब दुनिया को
नहीं फूल व खुशबू जुदा हैं
आवाम ही असली मालिक
सरकारें नहीं खुदा हैं।
किरचें व कंटीली तारें
फौजों की हटें ये कतारें
आओ इक साथ पुकारें
हम गले से लगना चाहें।
ए हिन्द-पाक के लोगो…

कई बीज इधर से जाकर
उस पार ज़मीं से फूटे
कई फूल उधर से आकर
इस पार फ़िज़ा में फूले।
हो एक सी आबो हवा जब
हो एक सा ताना बाना
मजहब की आड़ में फिर क्यों
मासूम लहू का बहाना।
हैं चांद और सूरज सांझे
झिलमिल तारे भी सांझे
है सांझा माज़ी अपना
सांझी आगे की राहें
ऐ हिन्द-पाक के लोगो…

  1. आवाम-जनसाधारण 2. फ़िज़ा-वातावरण 3. आबो हवा-जलवायु 4. माज़ी-अतीत

संपर्क – 94662-39164

2 thoughts on “ए हिन्द-पाक के लोगो – अमृल लाल मदान

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    Anonymous says:

    ए हिन्द पाक के लोगो … कविता को यूँ ट्यूब पर देने का शुक्रिया, सुभाष जी । अमृतलाल मदान

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    1. Avatar photo
      Prof. Subhash Chander says:

      धन्यवाद जी, युद्धोन्माद के समय इस तरह की रचनाएं बेहद जरूरी हो जाती हैं, कि उनको किताबों से बाहर लोगों में ले जाया जाए

      Reply

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