हम को दी हैं उदासियाँ, किसने – बलबीर सिंह राठी

ग़ज़ल


हम को दी हैं उदासियाँ, किसने,
ऐसी साजि़श, रची कहाँ, किसने!
ला के रख दी ये दूरियाँ, किसने,
मेरा लेना है इम्तिहां, किसने!
जो बग़ावत की बात करते थे,
कर दिया उनको बेज़बां, किसने!
किसने तौबा उड़ान से कर ली,
फिर बनाया है आशियाँ, किसने!
सानिहा1 देखकर तो सब चुप थे,
फिर ये क़िस्सा किया बयां, किसने!
क्या बतायें ये फ़ासला यारो,
रख दिया अपने दरमियाँ, किसने!
इन फ़जाओं में इतना ज़हरीला,
भर दिया इस क़दर धुआँ, किसने!
जब तलब थी मसर्रतों2 की मुझे,
दर पे रख दी उदासियाँ, किसने!
जो अभी तक कहीं पढ़ी न सुनी,
वो सुनाई है दास्तां, किसने!
अपनी ख़ातिर बना दिया ‘राठी’,
इतना दोज़ख नुमा जहाँ, किसने!
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  1. घटना 2. खुशी

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