चरण आपके पुष्प – स्वामी रामदास

स्वामी रामदास (1884-1963)
अनुवाद दिनेश दधिची

मधुमक्षिका पुष्प पर जैसे मँडराती है
उसी प्रकार हृदय मेरा, हे प्रभो!
आपके चरणों पर मँडराता है।
वह करती है मधु-पान और यह
अमृत-रस पीता रहता है।
वह पल दो पल क्रीड़ा करती,
पर मैं तो सदा विचरता हूँ।
वह छोड़ पुष्प को जाती है,
मैं सदा-सर्वदा चरणों में ही रहता हूँ।
मेरा जीवन संपन्न आपसे होता है, भगवन्!
कैसी अद्भुत संपूर्ति चरम–
माधुर्यपूर्ण, महिमामंडित, आनंदमयी!
प्रतिरूप आपका ही बन कर
अब एकाकार हो गया हूँ।

Swami Ramdas (1884-1963)

I am a Bee, Thy feet the Flower 

O Lord, my heart flutters over Thy feet
Like the bee on a flower.
The bee sucks honey,
My heart drinks nectar.
The bee plays for a while,
But I play eternally.
The bee leaves the flower,
I stay at Thy feet for ever.
My life is fulfilled in Thee.
What a consummation–
Sweet, glorious, ecstatic!
Am now one with Thee–become
Thy very image.

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