एमिली डिकिंसन की तीन कविताएं

एमिली डिकिंसन (1830-1886)  अनुवाद – दिनेश दधीचि

(1)

जड़े मोती हैं जिन प्यालों में
उनमें ढाल कर मैंने
चखा है स्वाद उस मय का
कि जैसी बन नहीं पायी किसी से।
नहीं मिलता है जाम ऐसा
कभी दरिया-ए-राइन के
सभी पैमानों में हरगिज़।
हवाओं का नशा मुझको
कि मयकश हूँ मैं शबनम का।
पिघलते आसमां की ख़ैरगाहों में
मुसलसल गर्मियों के दिन
इसी तरह बिताता हूँ।
तब तक पीता रहता हूँ
जब तलक फ़रिश्ते बर्फ़ ढकी टोपी अपनी
हैं नहीं झुलाते ख़ुद उतार कर
और वाइज़ जब तलक दरीचों की जानिब
ना दौड़ पड़ें ये देखने को
कि वो कौन-सा नन्हा मयकश है,
जो आफ़ताब से टेक लगाए बैठा है!
(मूल कविता का तीसरा पद्यांश इसमें शामिल नहीं है) 
Emily Dickinson (1830-1886)

I taste a liquor never brewed,
From tankards scooped in pearl;
Not all the vats upon the Rhine
Yield such an alcohol!
Inebriate of air am I,
And debauchee of dew,
Reeling, through endless summer days,
From inns of molten blue.
When landlords turn the drunken bee
Out of the foxglove’s door,
When butterflies renounce their drams,
I shall but drink the more!
Till seraphs swing their snowy hats,
And saints to windows run,
To see the little tippler
Leaning against the sun! 
 

(2)

आज की रात उसे, ऐ दिल, बस, भूल जायेंगे हम-तुम!
मुश्किल काम है, आओ, इसका बटवारा करते हैं.
उसने जो गर्माहट दी थी, तुम्हें भुलानी होगी,
और उजास मिला जो हमको, उसको मैं भूलूंगी.
जब तुम अपना काम कर चुको, प्लीज़ बताना मुझको,
मैं भी अपने खयालात को धुन्धला-सा कर लूंगी.
जल्दी कर लो, कहीं तुम्हारी इस सुस्ती-पस्ती में
मैं फिर उसे याद ना करने लग जाऊं दोबारा!
Emily Dickinson

Heart, we will forget him,
You and I, tonight!
You must forget the warmth he gave,
I will forget the light.
When you have done, pray tell me,
Then I, my thoughts, will dim.
Haste! Lest while you are lagging
I may remember him!

(3) 

एक और आकाश यहाँ है

 एक और आकाश यहाँ है
सदा शांत, अभिराम, अनोखा
एक और सूरज सज्जित है
अन्धकार में दीपित रहता.
सूखे हैं जंगल, मत सोचो
खेत मौन हैं, तो होने दो
यहाँ एक छोटा-सा वन है
जिसके पत्ते सदा हरे हैं
यहाँ एक उजला उपवन है
नहीं हुआ हिम से आच्छादित.
इसके सदा खिले फूलों में
सुनती हूँ मैं धीमा गुंजन
इक चमकीली मधुमक्खी का.
आओ, ऑस्टिन भैया, आओ;
मेरी इस बगिया में आओ!

Emily Dickinson 

There is another sky

 There is another sky,
Ever serene and fair,
And there is another sunshine,
Though it be darkness there;
Never mind faded forests, Austin,
Never mind silent fields –
Here is a little forest,
Whose leaf is ever green;
Here is a brighter garden,
Where not a frost has been;
In its unfading flowers
I hear the bright bee hum:
Prithee, my brother,
Into my garden come!

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