एक गांव दो चेहरे – सहीराम

कोई दो महीने पहले यह गांव पहली बार तब चर्चा में आया था,जब बीजिंग ओलंपिक में इस गांव के बेटे विजेंद्र ने मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीत कर अपने देश और अपने गांव का नाम रौशन किया था। जी हां, हम हरियाणा के भिवानी जिले के गांव कालूवास की बात कर रहे हैं। आज यह गांव एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन इस बार यह चर्चा दूसरी वजह से है और यह वजह, पहली वजह से एकदम उलट है और गौरव करने लायक नहीं, मानवता को शर्मसार करनेवाली है।
दीवाली के दिन इस गांव की दो बेटियों को उनके परिवारीजनों और जातभाइयों ने जिंदा जला दिया। ये दोनों बच्चियां नाबालिग थी। उम्र यही कोई चौदह-पंद्रह वर्ष। वजह यह थी कि दीवाली के दिन वे अपने दोस्त लडक़ों को शुभकामनाएं देने चली गयी थी। रात होने पर भी जब वे नहीं लौटी तो तलाश हुयी। तभी गांव में एक गाड़ी आयी और ये बच्चियां उस गाड़ी से उतरी। उन्हें ढ़ंूढ़ रहे लोगों ने यह देखा तो आगबगूला हो गए और गाड़ी को रोकने की कोशिश की। नहीं रुकी तो पत्थर फेंके और उसके बाद उनका सारा गुस्सा इन बच्चियों पर उतरा। उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा गया। बच्चियां बेहोश हो गयी। बाद में श्मशान ले जाकर मिट्टïी का तेल डालकर उन्हें जला दिया गया। दो हफ्ते तक यह बात गांव के बाहर नहीं गयी। गांव में और जाति में हुक्का-पानी बंद होने की धमकियों के बीच यह सहमति बनी थी कि इस पूरी घटना का कोई जिक्र न हो। लेकिन एक जागरूक गांववासी ने पुलिस और मानवाधिकार आयोग को खबर कर दी और यह मामला सामने आया।
इज्जत के नाम पर परिजनों और जातभाइयों द्वारा अपने ही बच्चों को मौत के घाट उतार देने के मामले में हरियाणा तथा पश्चिम उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र अब तक काफी कुख्यात हो चुका है। यह वह क्षेत्र है जिसे हरित क्रांति ने भारी समृद्घि बख्शी है। गांवों में रहन-सहन में आधुनिकता आयी है। पर सोच में आधुनिकता नहीं चाहिए। इस समृद्घि में इजाफे के लिए नौकरी तो चाहिए और इसके लिए अच्छी तथा आधुनिक शिक्षा भी चाहिए। लेकिन शिक्षा के साथ आनेवाली तब्दीलियां नहीं चाहिए। टी वी, फैशन, सिनेमा, शिक्षा तो सब चाहिए। लेकिन जहनियत कबिलाई रहनी चाहिए।
इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहा जाए कि मुक्केबाजी में गांव का नाम रौशन करनेवाला स्टार बेटे की बिपाशा बसु के साथ डेट पर जाने की बात हो तो खुशी हो, वह फिल्म अभिनेत्रियों के साथ डांस करे, वह मॉडल्स के साथ रैंप पर चले तो गर्व हो, उसके लिए तालियां बजें, वाह-वाही हो। लेकिन गांव की बेटियां अपने दोस्तों को त्यौहार की शुभकामना देने भी न जाएं। जाएं तो जान से जान से जाएं और मुक्केबाजी के स्टार बेटे पर लाखों की दौलत बरसानेवाली राज्य सरकार, अभागी बेटियों की ऐसी भयावह मौत पर चुप्पी साध जाए।

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