मुन्शीराम जांडली

मुन्शीराम जांडली

जिला फतोहाबाद के जांडली गांव में साधारण किसान परिवार में 23 जून 1915 को जन्म। जांडली गांव में अनपढ़ता को दूर करने के अभियान में पढऩा लिखना सीखा। हरिचन्द जी के संपर्क में आने से इनकी रचनाएं श्रृंगारिकता से सामाजिक सरोकारों से जुड़ी। छुआछात, अंधविश्वास, धार्मिक पाखण्ड पर इनकी रागनियां खूब लोकप्रिय हुई। 1 नवम्बर 1950 को देहावसान। छायाचित्र उपलब्ध नहीं।

1

पूजनीय भारत के नेता समदर्शी होए ब्रह्मज्ञानी
जात माणस की एक कहैं क्यूं भींट करो हिन्दुस्तानी
 
देशी खाण्ड बिदेशी घी और सब नै बिस्कुट खाए तम्हें
होए सवार रेल मोटर मैं औडै़ भिटण ना पाए तम्हें
नल का पाणी पिया मजे मैं क्यूं ना मरे तिसाए तम्हें
कट्ठा काम कर्या खेतां मैं दस दिन तक ना नहाए तम्हें
गाळ गळी मैं पल्ला लागै नहाएं सुधरै जिंदगानी
मेले के मैं धक्कम धक्का औडै़ भींट क्यूं ना मानी
 
उड़द चावळ और मूंग भिंटै ना, रंदती दाळ भिंटै थारी
गुड़ शक्कर घी खाण्ड भिंटै ना, रगड़ी मिर्च भिंटै थारी
चादर दोहर खेस भिंटज्या, ना बांधी पांड भिंटै भारी
काचा कोरा थान भिंटै ना, भिंटै पुराणी बेमारी
जोहड़ा जोहड़ी नदी भिंटै ना, कुंआ भिंटै बड़ी नादानी
गाय भैंस बकरी भिंटती ना, दूध भिंटै घल के पानी
 
सोंए बैठे खाट भिंटै, ना भिंटती सिर पै ठायां तै
सिर बुक्कळ मैं ना भिंटै बिस्तरा, भिंटज्या तुरंत बिछायां तै
बरी बाल्टी डोल भिंटै ना, घडिय़ा भिंटै चकायां तै
कुत्यां तक की झूठ नहीं, भिंटै हाथ माणस कै लायां तै
सौ सौ गाळ बकै मूरख जद भंगी जा चुल्हे कानी
चुहड़ी चमारी फिरै सुपे मैं बेमाता दाई जानी
 
गाजर मूळी गंठे काकड़ी चुहड्यां पै मंगवाओ सो
आलू गोभी मटर टमाटर अरबी शलगम खाओ सो
सेब संतरे आम नारियल हथो हथी ले आओ सो
सारी चीज भिंटण आळी तुम कोन्या भिंटी बताओ सो
एक्का मेल मिलाप करो गुरु हरिचन्द रह सैलानी
कहै मुन्शीराम जांडली आळा काढो दिल की बेईमानी
 

2

थोड़े से दिन थ्वावस करो आजादी रंग चा कर देगी
घी खाण्ड अनाज कपड़ा सोना-चांदी सस्ते भा कर देगी
 
गाम गाम मैं खुलैं मदरसे विद्या पढ़ो मौज के म्हं
ताजे कपड़े घड़ी हाथ कै रहंगे नोट गोज के म्हं
होस्पीटल सफाखाने खुलज्यां एक दो तीन रोज के म्हं
सारे काम बणैं कल के ना टुटै नाड़ बोझ के म्हं
छुआछात का भूत काढ़ दो गोरमेंट न्या कर देगी
ऊंच नीच का ख्याल रहै ना देश एक सा कर देगी
 
कोठी कमरे फर्श गिलोरी पंखे लगै शाळ के म्हं
झांकी जंगळे लगै चुफेरै लूटो ऐश बाळ के म्हं
हरी पीळी लाल रोशनी बिजळी गाळ गाळ के म्हं
कुरसी मेज बिछै पलंग भोजन मिलै थाळ के म्हं
साईकिल तांगे टमटम चालैं सब पक्के राह कर देगी
झगड़े बाजी मिटैं मुकदमे ठीक फैसला कर देगी
 
पाणी के नल फर्स लागज्यां ठण्डे गरम फव्वारे हों
तेल फलेल इतर केसर कस्तूरी के छिड़कारे हों
सभी जगह पै नहर फिरैंगी बाग बगीचे न्यारे हों
सेब संतरे आम नारियल पीस्ते दाख छुहारे हों
उड़द गेहूं धान उपजै बर्षा ज्यादा कर देगी
कमती दान जनेती थोड़े बिना खर्च ब्याह कर देगी
 
एका मेल मिलाप करो कुछ फायदा नहीं बैर के म्हं
पाप कपट बेईमाना छोड़ो ना फूको गात जहर के म्हं
सारी चीज हौवै खेतां मैं ना जाणा पड़ै शहर के म्हं
गऊ माता का कष्ट मिटैगा सूनी फिरै डैर के म्हं
गुरु हरिचन्द कह रोटी मोटर खेतां मैं जाकर देगी
नगर जांडली छोटी गाणा मुंशी राम का कर देगी
 

3

गपियां नै गपोड़े रूडाए हिन्दुस्तान म्हं
 
गोबर म्हं तै गोरख होग्या हवा मैं तै हनुमान
लंका छोड़ बिलंका कुद्या छाळ मैं लगाया ताण
पर्वत लेकै ऊपर चढ़ग्या भरत का ना टूट्या बाण
निकल्या सूरज झपट लिया पनमेशर का लेकै नाम
पांच सात दस घण्टे सूरज मुंह के म्हं लिया थाम
फंकारे सेती किरण छुटी जब दुनियां म्हं दिख्या घाम
यें आछे घस्से रोड़े उजाड़ बियाबान म्हं
 
अंबर पै तै देवी उतरी हाथां म्हं करै थी खाज
ब्रह्मा विष्णु शिवजी तीनों हथेळी म्हं तै होगे आज
ब्रह्मा नै सृष्टि रच दी विष्णु नै जमाया राज
बिना पृथ्वी मां ब्रह्मा की क्यां कै ऊपर खड़ी होगी
अम्बर पैं तै देवी उतरी बिन धरती क्यां पै पड़ी होगी
बिना मनुष्य बेमाता नै देवी क्यूकर घड़ी होगी
अम्बर तै बड़े सिवाड़े रै अनाड़ी बोले जहान मैं
 
ख्याल करकै सुणते जाइयो झूठ का भभूका भाई
राक्षसणी कै पैदा होग्या घड़ी म्हं घड़ुका भाई
अस्त्र शस्त्र लेकै भारत म्हं दड़ूक्या भाई
उसका लड़का मेघवर्ण पत्थर के चलाए तीर
दुर्योधन दुशासन सुगनी हार गए सारे वीर
कान म्हं तै कर्ण होग्या राक्षस का दिया गात चीर
मरे प्रजा के हाथी घोड़े अर्जन के एक बाण म्हं
 
दोसौ तीनसौ चारसौ पांसौ छसौ मण का पड़ग्या गोळा
भीम बली बलवान जहर पीगे मण सोळां
दरिया कै म्हं बहा दिया पताळ म्हं माच्या रोळा
सर्प कै एक लड़की कहिए अहलावती उसका नाम
भीम बली जीवा लिया सिद्ध किया अपणा काम
सत्तर कुंडी अमृत पीग्या ईश्वर का लेकै नाम
ये ठीक मात्रे जोड़े कवि मुन्शीराम नै
 

4

घरां बैठ के ग्रंथ बणा ले झूठ चलावण लागे
जीभ चटोरे ऊत लुटेरे जाल फैलावण लागे
 
विध्यांचल पर्वत  पै तप करै पारासुर ब्रह्मचारी,
पारासुर का पारा ले कै लेग्या काग उडारी,
पारा घुटग्या मछली गिटगी लागे जाळ शिकारी
उस मछली कै पैदा होगी मछोदर राज कुमारी
मीन ओर मिंडक किच्छु मिलकै लड़की जमावण लागे
ब्रह्म पारासुर लड़की तै भोग करावण लागे
 
अंजली देवी गुरु बणा कै बेठी रही ध्यान म्हंं
शिवजी नै गुरु मन्त्र दे दिया मारी फूंक कान म्हं
बजरंग बली होए मां अंजनी कै बंदर किसी श्यान म्हं
हनुमान का पिता पवन जो चालै रोज जिहान म्हं
गोतम के घर चंद्रमा कै स्याही लावण लागे
 
उद्यालक ब्रह्मचारी नै दरिया म्हं फूल तिराया
फूल केतकी राजकुमारी चन्द्रवती नै ठाया
सुतरा लाग्या बहोत घणा लिया उठा नाक कै लाया
नास केत ब्रह्मचारी का नासां का जन्म बताया
श्रृंगी ऋषि सींग म्हं होगे सींग हिलावण लागे
आंख नाक ओर कान सींग म्हं पुत्र जमावण लागे
 
लंकापति कै बीस भुजा दस शीश बता राखे सैं
भस्मासुर नै शिवजी विष्णु बहु बणा राखे सैं
बाणासुर कै लाख हाथ कई पहाड़ उठा राखे सैं
राजा सुगड़ कै पुत्र साठ हजार जमा राखे सैं
वासुदेव के कृष्ण नै तुम जार बतावण लागे
कहै मुन्शी राम जाण्डली आळा पोप भकावण लागे
 

5

बेद व्यास नै ग्रंथ बणाया अठारह पुराण कहै सैं
भगवत गीता देवी विष्णु शिव परमाण कहै सैं
 
श्रीमद्भगवत गीता के श्लोकों मै चाहे लिख्या देख ल्यो तड़के
नारायण कै पहरा दे, जय विजय दो लड़के
शंका दिक ऋषि गए स्वर्ग मै तळै गेरे हाथ पकड़के
तीन जन्म करो बुरे काम बैकुंठ मिलैगा अड़के
वेद चुरा के लाया था काश्व बलवान कहैं सै
ब्रह्मा बण कै विष्णु पंहुच्या भारी शैतान कहैं सै
 
विष्णु पुराण म्हं विष्णु की नाभी म्हं कमल उपजाया,
कमल फूल म्हं ब्रह्म होगे उसनै संभव यज्ञ रचाया,
सतरुपा राणी कै दस लड़के प्रजापति की माया,
उसकै तेरह कन्या थी ऋषियां तै ब्याह कराया
सृष्टि उत्पन्न कर दी उसनै रच दिया असमान कहैं सैं
चन्द्र तारे, बादळ, बिजळी रच दिया भान कहैं सैं
 
शिवजी नै नारायण जन्में ब्रह्म ऋषि खड़े थे
किस ढाळ रचाऊं दुनियां नै जल सारै चढ़े खड़े थे
गया फूट बुलबुला पाणी का म्हैं विष्णु जी लिकड़े थे
पुत्र पिता क��� झगड़ा होग्या वें लाखों वर्ष लड़े थे
विष्णु गया पताळ लोक ब्रह्मा आसमान कहैं सैं
गऊ माता नै झूठ बोल दी उनका घटग्या मान कहैं सैं
 
सूर्य पुराण मैं सूरज नै रची सृष्टि ब्रह्मांड मैं
दुर्गे पुराण मैं दुर्गे नै संसार रच्या मारकंड मैं
गरूड़ पुराण मैं न्यारा रच दिया बाकी गणेश खंड मैं
झूठी शिक्षा देवण लागे दुनिया फसगी फंड मैं
श्री रामचन्द्र कृष्ण जी नै दुनिया भगवान कहै सैं
मुंशीराम तेरी जांडलियां म्हं सब विद्वान कहैं सैं
 

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