बोल बम, बोल बम – ओम सिंह अशफाक

ओम सिंह अशफाक 

1

जिनका आज राज है, उन्हीं का सुराज है।
शिक्षा भी उनकी है, स्कूल भी उनका।
शाखा भी उनकी है, फूल भी उनका।
शास्तर भी उनका है, शस्तर भी उनका है।
गुजरात भी उनका है, बस्तर भी उनका।
गलबा भी उनका है, मलबा भी उनका है।
तेरा क्या है फटकचंद! बोल-बम, बोल-बम।।

2

अयोध्या भी उनकी है, राम भी उनका।
मथुरा भी उनकी है, श्याम भी उनका।
आस्था भी उनकी है, कत्लेआम भी उनका।
हिमालय भी उनका है, हिन्दी भी उनकी।
माथा भी उनका है, बिन्दी भी उनकी।
थान भी उनका है, चिन्दी भी उनकी।
तेरा क्या है फटकचंद! बोल-बम, बोल-बम।।

3

गंगा भी उनकी है, मंदिर भी उनका।
सरस्वती उनकी है, समन्दर भी उनका।
द्वारका उनकी है, द्वारपाल भी उनका।
प्रधानमंत्री उनका है, राज्यपाल भी उनका।
गोडसे भी उनका था अब गांधी भी उनका है।
नकदी भी उनकी है, चांदी भी उनकी है।
शहीद भी उनके हैं ताबूत भी उनका।
जांच भी उनकी है, सबूत भी उनका।
तेरा क्या है फटकचंद! बोल-बम, बोल-बम।।

4
लोकतंत्र भी उनका है, तानाशाही भी उनकी।
पाखंड भी उनका है, सफाई भी उनकी।
छल-छदम उनका है, ढिठाई भी उनकी।
सरकार उनकी है, तन्तर भी उनका।
पिशाच उनके हैं, मन्तर भी उनका।
मंत्री उनका है, विनिवेश उनका।
विध्वंस उनका है, फिर भी देश उनका।
तेरा क्या है फटकचंद! बोल-बम, बोल-बम।।
5
उन्हीं की मर्यादा है, उन्हीं का उल्लंघन है।
उन्हीं की सीता है, उन्हीं का रघुनंदन है।
उन्हीं के बन हैं, उन्हीं के बनवासी।
उन्हीं का वृंदावन्, उन्हीं की काशी।
उन्हीं की अग्नि है, उन्हीं का कलाम है।
उन्हीं का पोखरण है, उन्हीं का रतलाम है।
उन्हीं की रेल है, उन्हीं का जोन है।
उन्हीं का उत्पात है, उन्हीं का मौन है।
बार-बार बोलता है। तू तीसरा कौन है?
तेरा क्या है फटकचंद! बोल-बम, बोल-बम।।
(जुलाई-अगस्त 2002)

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