एक बच्ची की अभिलाषा -सुरेश बरनवाल

कविता


मम्मी मुझको दिलवा दो तुम
एक खिलौना छोटा सा
पेट हो उसका मटका चाहे
या सिर उसका लोटा सा
दांत नहीं हो चाहे उसके
नाक हो चाहे पकोड़ी सी
सूरत में चाहे हो बंदर
पर अकल मिली हो थोड़ी सी
नहीं होते सवाल जो मुझसे
उससे मैं करवाऊंगी
जिस दिन पड़ेगी डांट मुझे
मैं मुर्गा उसे बनाऊंगी।

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