करमचंद केसर – देस्सी खाणा आच्छा लाग्या

हरियाणावी गजल


देस्सी खाणा आच्छा लाग्या
सादा बाणा आच्छा लाग्या

तड़कै – तड़कै किरसन जी के
दर पै जाणा आच्छा लाग्या

इस कल़जुग म्हं नेता जी का
फरज निभ्याणा आच्छा लाग्या

बात – बात पै बैरण तेरा
मुँह फुलाणा आच्छा लाग्या

घड़वा बैन्जू बीन बांसली़
साज पराणा आच्छा लाग्या

रिश्तेदार मित्तर प्यार् याँ का
हमनैं चाह् णा आच्छा लाग्या

चलती बस म्हं उस छोटू का
सुर म्हं गाणा आच्छा लाग्या

मेरी ग़ज़ल म्हं फनकारां का
कमी बताणा आच्छा लाग्या

छोड़ डिगरग्या.फौज्जण का मनैं
यू उलाह् णा आच्छा लाग्या

बाब्बू आग्गै ‘केसर’ तेरा
नजर झुकाणा आच्छा लाग्या

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