आज सार्यां नै सस्पैंड करकै जान्दा

एक बै की बात सै-एक स्कूल के बारणै आग्गै कार रूकी और उसमें तै एक पढ्या-लिखा सा आदमी उतर कै उसे कमरे में जा बड्या जित बालक घणां शोर कर र्ये थे। उसके भीतर आंदे बालक चुप हो गए अर क्लासटैंड-जयहिन्द करी।

वो धमका कै बोल्या-क्यूं आसमान सिरपै उठा राख्या सै-तुम्हारा मानीकर कहां है? एक छोरे नै डरते-डरते हाथ ठाया-मैं सूं जी। तूं सै! छोरा और डरग्या अर न्यू बोल्या-ना जी मैं तो बाहर चाकी दुकान पै कप धोया करूं, मानीटर तो डांगर चराण जा र्या सै।

अफसर सा माणस बोल्या-तुम्हारा मास्टर कहां है? बालकां नै शीशम तलै बैठे आदमी की तरफ इशारा कर दिया। उसके धोरै जाकै ओ बोल्या-क्यूं मास्टर जी। रातनै के मशीन में गैरे लावै था जो ईब सोण लगर्या। मास्टर हड़बड़ा कै उठ्या और बोल्या-सरजी मैं तो गाम का डाकिया सूं। मास्टश्र तो पाणी देण जार्या सै। ओ माणस या सुणकै दफ्तर घाणी हो लिया। जाकै देख्यिा ओड़े एक आदमी आराम तै बैठ्या अर बीड़ी के सुट्टे मारण लागर्या था। ओ अफसर सा माणस बोल्या-हैडमास्टर साब, क्लास में मनीटर नहीं, स्कूल मेें मास्टर नहीं, अर् आप दफ्तर में बैट्ठे बीड़ी पीण लागर्ये  सो।

ओ आदमी एकदम कुर्सी पर तै उठ्या अर हाथ जोड़ कै बोल्या-साब जी मैं तो गाम का सरपंच सूं। हैडमास्टर तो आज सिमघाणै जार्या सै। या सुण कै उस अफसर जिसे माणस नै भी मात्थै हाथ मार्या। न्यूं बोल्या-काश! मैं भी नकली अफसर न होंदा। जै असली होन्दा तो आज सार्यां नै सस्पैंड करकै जान्दा।

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