तेरा बाब्बु भी आर्या सै

लोक-विनोद


मां के मर्यां पाच्छै रमलू नै एक दिन पूच्छा करवाई तो उसनै न्यूं बता दिया अक् तेरी मां कुतिया की जोनी में गई है, तूं उसकी सेवा करेगा तो तेरे जरूर लाभ होवैगा। रमलू जाण लागर्या था, राह में एक कुतिया देखी तो उसने मैं समझ कै घरां ले आया। घरवाली तै सारी बात समझा कै उसकी सेवा करण की कही। एक दिन की बात सै-रमलू की घरवाली नै सासु जी के नुहाण धुआण अर खुवाण के चक्कर में खेत की रोटियां नै वार होग्यी। वारी सी खेत में गई तो उस कुतिया की गेल्यां-गेल्यां एक कुत्ता भी भाग लिया। जा कै रोटियां का डिब्बा तार्या तो रमलू छोह में भरकै बोल्या-‘इतनी हाण कड़ै ला दी’ मैं भूख मार दिया। वा बोल्ली कोनी। फेर रमलू बोल्या-के मुंह में जबान कोनी-चुपचाप खड़ी। वो कुत्ते कान्ही इशारा करकै धीरे से बोल्ली-शर्म आवै से, उरांह्नै देख। तेरी मां की गेल आज तो तेरा बाब्बु भी आर्या सै।

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