रूठ गया हमसाया कैसे – बलबीर सिंह राठी

ग़ज़ल


रूठ गया हमसाया कैसे,
तुम ने वो बहकाया कैसे।
जिस्म तो जिस्म था उसमें आखिर,
इतना नूर समाया कैसे।
तुमने अपने जाल में इतने,
लोगों को उलझाया कैसे।
तुम ने उस दुश्वार सफ़र में,
मेरा साथ निभाया कैसे।
सदियों तक लोगों का तुमने,
इतना बोझ उठाया कैसे।
इतना अँधेरा मक्कारों ने,
हर जानिब फैलाया कैसे।
‘राठी’ जी का गीत रसीला,
भीड़ को इतना भाया कैसे।
 
 

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