वैज्ञानिक मानसिकता का समाज पर प्रभाव -सुरेश कुमार

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अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के आह्वान पर देशभर में चलाए जा रहे अभियान के तहत अंधविश्वास, रूढिवाद, अज्ञानता, जातिवाद जैसी भयंकर कुरीतियों व मानसिकता के खात्मे के लिए लम्बी लड़ाई लड़ने वाले एवं साम्प्रदायिक ताकतों के हाथों कत्ल का शिकार हुए प्रगतिशील वैज्ञानिक डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की याद में लॉर्ड शिवा मॉडल स्कूल में एक सेमिनार का आयोजन हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति व सीनियर सिटीजन कौंसिल जींद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसका मुख्य विषय *वैज्ञानिक मानसिकता का समाज पर प्रभाव* था। सेमिनार की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस जयवंती श्योकंद व मंच संचालन समिति के सचिव सोहन दास ने किया।

मुख्य वक्ता एवं ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के सलाहकार व डॉ. ओ पी ग्रेवाल संस्थान की कार्यकारिणी के सदस्य श्री सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानसिकता को अपना कर ही हम एक बेहतर नागरिक समाज की स्थापना कर सकते हैं। वर्तमान में बहुत ऊंचे पदों पर बैठे लोगों द्वारा भी अव्यवहारिक और गैर वैज्ञानिक बातों का प्रचार बड़े जोर शोर से किया जा रहा है। विज्ञान और संस्कृति को धार्मिक रंग देकर लोगों की भावनाएं भड़काई जा रही है। प्लास्टिक सर्जरी से गणेश , इंटरनेट से महाभारत युद्ध देखना, हनुमान की विमान से भी तेज रफ्तार बताना तथा कृत्रिम गर्भाधान से कौरवों की उत्पत्ति जैसी बेतुकी वह बेबुनियाद बातों से लोगों को भ्रमित करना, बड़े पैमाने पर जारी है। ऐसे माहौल में विज्ञान और संस्कृति की सही और प्रमाणिक बातों को जानना और समझना बहुत जरूरी है। क्योंकि विकास विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं के बीच ज्ञान और व्यवहार के सघन आदान-प्रदान से हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि एक वैज्ञानिक भी वैज्ञानिक मानसिकता वाला हो, यह जरूरी नहीं है। किसी बीमारी का इलाज झाड़ फूंक से नहीं बल्कि विज्ञान पर आधारित तकनीक से डॉक्टरों द्वारा इलाज से ही संभव है। आजकल स्वयं या अपनी संस्कृति को बड़ा बताने की बड़ी बड़ी बातें ज्यादा की जा रही है। ऐसे हालात में हर मुद्दे पर जनतांत्रिक तरीके से बहस और विमर्श का वातावरण बना कर ही गैर वैज्ञानिक विचार को पीछे धकेला जा सकता है। इंटरनेट व सोशल मीडिया के प्रयोग ने जहां हमें बहुत ज्यादा जानकारियां दी हैं, वही उससे आगे भी एक नागरिक समाज बनाने में बहुत सारी चुनौतियां हमारे सामने हैं। इन चुनौतियों की पहचान करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनका समाधान करना समय की जरूरत है।

इस मौके पर विजय शर्मा एडवोकेट ने डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर के अंधविश्वास के विरुद्ध दिए गए भाषण के मुख्य अंशों को पढ़कर सुनाया। जिसमें समाज की एकता तथा देश की अखंडता के लिए सभी नागरिकों में वैज्ञानिक मानसिकता का विकास करने व इसके प्रचार-प्रसार के लिए भारतीय संविधान की धारा 51ए(एच) में सभी नागरिकों का यह कर्तव्य भी माना गया है कि वह वैज्ञानिक मानसिकता को बढ़ावा दे।

सेमिनार में डॉ. रणबीर मलिक, कर्मचन्द, राजेश, राजबाला, मा0 रोहताश, होशियार सिंह, रामफल दहिया, जगवंती, नूतन प्रकाश, अजीत गौतम, आज़ाद पांचाल, कर्मबीर सिंह समेत करीब 120 सीनियर सिटीजन्स, सामाजिक कार्यकर्ता व बुद्धिजीवीयों ने भाग लिया। समिति के जिला प्रधान सुरेश कुमार ने सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए सेमिनार का समापन किया।

जारीकर्ता
सुरेश कुमार
जिला प्रधान,
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति
जिला जींद।

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