लोकतंत्र व सामाजिक न्याय की शत्रु है – मॉब लींचिंग

गतिविधियां


डॉ ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान ,कुरुक्षेत्र की सामाजिक न्याय समिति की तरफ से 9अगस्त 2018 को ‘माब लींचिंग -भारत छोड़ो’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष डॉ टीआर कुंडू ने की और संचालन समिति संयोजक अश्विनी दहिया ने किया। संगोष्ठी का परिचय रखते हुए संस्थान के सचिव डॉ. सुभाष चंद्र ने संगोष्ठी में आए लोगों का स्वागत किया, ग्रेवाल अध्ययन संस्थान की गतिविधियों से परिचय करवाया तथा विषय की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भीड़तंत्र लोकतंत्र के लिए खतरा है और यह सामाजिक न्याय का सवाल है परंपरागत तौर पर दलित-दमित-वंचित लोग ही इसका शिकार होते हैं। बड़ी चिंता की बात है कि शासन-सत्ताएं हमारे नागरिकों को भीड़ में तब्दील करने में सहयोगी बन रही हैं। जाति-धर्म की भीड़ की आड़ में छुपकर घोर अपराधी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। इसके वर्तमान संदर्भों को समझना जरूरी है।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में प्रो. महावीर जागलान ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि माब लींचिंग आज की नहीं पुराने समय से चली आ रही है, जिसमें भीड़ किसी को डायन और कभी कुछ कह कर पीटती है। महिलाएं, दलित, अल्पसंख्यक सहित समाज के कमजोर तबके इसका शिकार बनाए जाते हैं। पहले भी इस प्रकार की घटनाएं होती थी, लेकिन अब यह अनजाने में नहीं हो रहा। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि 371 में से 228 मामलों में अल्पसंख्यक को पिछले चार सालों में शिकार बनाया गया है। पिछले एक साल में 30 केस हुए हैं 9 राज्यों में। इनमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के हैं। यह नोर्मल माब लींचिंग नहीं है। इसका एक खास पैटर्न है। गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी हो रही है।  माब लींचिंग 1984 और 2002 में मोब लींचिंग की बड़ी घटनाएं हुई। मोब लींचिंग पर कानून का अभाव है।  जिग्नेश मेवानी, कन्हैया कुमार आदि ने मिल कर मानव सुरक्षा कानून नाम से नए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया है। क्या कानून बनाने से समस्या का समाधान हो जाएगा। मनगढंत नैरेटिव को काटने के लिए और धर्म निरपेक्षता को बचाने के लिए सही परिप्रेक्ष्य में लोगों से बातचीत करनी होगी।

प्रेम सिंह ने कहा कि मनुवादी सोच मोब लींचिंग का आधार है। मनुवाद मनुष्य के भेदभाव को तार्किक आधार देता है। विजय ने कहा कि सोशल मीडिया को बुराई की तरह ही रखना ठीक नहीं है। सोच के साम्प्रदायीकरण की कोशिशें करने वाले इसका जमकर प्रयोग करते हैं तो प्रगतिशील लोग क्यों नहीं करते।

इंदर सिंगला ने कहा कि मोब लींचिंग पूंजीवाद की सवारी है। समस्या अर्थव्यवस्था है। नोटबंदी विफल हुई तो गाय व गीता आदि के मुद्दे उछालते हैं ताकि असली मुद्दों पर लोगों का ध्यान ना जाए।

रविन्द्र गासो ने कहा कि इंसाफ पसंद जागरूक लोगों को बात करनी चाहिए। मोब लींचिंग के खिलाफ सामाजिक सांस्कृतिक लड़ाई है। हिंदू राष्ट्र नफरत का एजेंडा है। सरस्वती नदी जैसे मिथ बनाए जा रहे हैं। हिंदू राष्ट्र की अवधारणा वर्ण व्यवस्था को लागू करने की साज़िश है।

जिले सिंह सभ्रवाल ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने भारत को संपूर्ण संविधान दिया। आज भारत में संविधान को लागू करने की प्रतिबद्धता से सरकार पीछे हट रही है। यही कारण है कि मोब लींचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं।

विजय विद्यार्थी ने संगोष्ठी में बातचीत करने वालों को कबीर और अंबेडकर की विरासत को आगे बढ़ाने वाला बताया। ओम सिंह अश्फाक ने दुलीना कांड को याद करते हुए कहा कि यह मोबचिंग की ही घटना थी। मोब लींचिंग का इलाज अंबेडकरवाद में है। अंबेडकर ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष को मोब लींचिंग खत्म करने का महामंत्र बताया। समय समय पर शांति मार्च निकालकर हम इस प्रकार की घटनाओं का जवाब दे सकते हैं।

एसपी सिंह ने कहा कि मोब लींचिंग के विविध आयाम हैं। अलग अलग स्थानों पर इसके अलग अलग डिजाइन हैं। समाज के कमजोर तबकों को इसका शिकार बनाया जाता है। मजबूत लोग मोब लींचिंग करते हैं। वैचारिक रूप से कमजोर लोग इसका समर्थन कर सकते हैं। यह फासीवाद का ही एक रुप है। भीड़ तंत्र मजबूत होगा तो लोकतंत्र कमजोर होगा। सबसे बड़ा सवाल है कि हम क्या करें। हमें ऐसा मिकैनिज्म विकसित करना चाहिए कि साम्प्रदायिक विचार पैदा ना हो।

हरपाल गाफिल ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत सभी प्रकार की समस्याओं का निराकरण हो सकता है। नाज़ुक मसलों को मशीनी ढंग से हल नहीं हो सकता। स्वतंत्रता आंदोलन

शब्बीर लियाकत अली ने बताया कि पांचवीं बार हिंसा का शिकार हुआ। 15 लोगों ने पीटा। दाढ़ी खींची। मुस्लिम को शिकार बनाया जा रहा है।

लियाकत अली ने कहा कोर्ट में चक्कर काटने पड़े। झांसा चौंकी के पास अन्य साथी पर हमला हुआ। कुछ लोग तमाशा देखते रह जाते हैं।

रजविन्दर चंदी ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को सहयोग का आश्वासन दिया। रानी ने कहा कि मोब लींचिंग एक अपराध है। गाय एक बहाना है। इसकी आड़

कर्मबीर ने कहा कि आस्था को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के बिना राजनैतिक परिवर्तन नहीं हो पाएगा।

चर्चाओं का समेकन करते हुए मुख्य वक्ता डॉ महावीर जागलान ने कहा कि साम्प्रदायिक सोच धीरे धीरे फैलाई गई है। व्हाट्स अप व सोशल मीडिया के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकारें भी इसका बहाना बना रही हैं।

अध्यक्षीय टिप्पणी रखते हुए टीआर कुंडू ने सामाजिक न्याय समिति और मुख्य वक्ता को बधाई देते हुए कहा कि मोब लींचिंग का पर्दाफाश किया गया है। हमें प्रोएक्टिव होने की जरूरत है। भारत का संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है। जो इसे लागू ना कर सके, उसकी विफलता उजागर की जानी चाहिए। स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व संविधान के आधार भूत सिद्धांत हैं। बहुलता, धर्मनिरपेक्षता और कानून का शासन की बात की गई। कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार का दायित्व है। जो यह काम ना कर सके, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।

सुभाष ने कहा कि गोष्ठियां बौद्धिक विलास में तब्दील ना हों। संस्थान की बौद्धिक भूमिका के रूप में हम सभी को अपने संपर्क के साथियों से चर्चा करनी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *