मुकेश अग्रवाल – सिर्फ एक इंसान हूं मैं

कविता


किसी दल से सरोकार नहीं,
राजनीति मेेरा आधार नहीं।
सिर्फ एक मानव हूं मैंं,
कोई धर्म मुझे स्वीकार नहीं।।

इतिहास गढऩे की इच्छा नहीं,
प्रवर्तक बनने का शौक नहीं।
आम रहना चाहता हूं,
खास बनना स्वीकार नहीं।।

प्रकृति से विमुखता नहीं,
आत्म से व्याकुलता नहीं।
सच में जीना चाहता हूं,
झूठ मुझे स्वीकार नहीं।।

स्वर्ग से मुझको मोह नहीं,
नरक से भी चिढ़ नहीं।
कर्मोनुसार फल मिले,
पक्षपात मुझे स्वीकार नहीं।।

आलोचना करने से भय नहीं,
प्रशंसा से परहेज नहीं।
योग्य व्यक्ति की कद्र हो,
अयोग्य मुझे स्वीकार नहीं।।

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (अंक8-9, नवम्बर2016 से फरवरी 2017), पेज-

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.