शहीद उधम सिंह का गदर पार्टी से संबंध

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‘गदर डायरेक्टरी’


गदर पार्टी का झंडा

1913 में  अमेरिका और कनाडा के भारतीयों ने ग़दर पार्टी की स्थापना की। इसका मकसद भारत को अंग्रेज़ों से स्वतंत्र कराना था। पार्टी “हिन्दुस्तान ग़दर” नाम का पत्र भी निकालती थी जो उर्दू और पंजाबी में छपता था।  ग़दर पार्टी के महान नेताओं सोहन सिंह भाकनाकरतार सिंह सराभालाला हरदयाल आदि ने जो कार्य किये, उसने भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को उत्प्रेरित किया।
प्रथम लाहौर षड्यंत्र केस में करतार सिंह सराभा, विष्णु गणेश पिंगले, जगत सिंह, सुरेैन सिंह बड़ा तथा सुरैन सिंह छोटा सहित सहित सात गदर क्रांतिकारियों को फांसी हुई, और 27 को काला पानी भेज दिया गया। इसी तरह षड्यंत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे मुकदमे भी चले, दूसरे मुकदमें में पांच को फांसी और 46 को काला पानी, तीसरे में पांच को फांसी और 6 को काला पानी तथा चौथे और पांचवे में दो को फांसी की सजा हुई। इसके अतिरिक्त 145 गदर क्रांतिकारी फांसी लगने से या फिर जेल में भूख हड़ताल करते हुए या फिर यातनाओं का शिकार होकर शहीद हो गए। 306 को काला पानी भेजा गया तथा 77 को कमतर सजाएं मिली।
सिंगापुर में गदर आन्दोलन की प्रेरणा से जिन भारतीय टुकडिय़ों ने बगावत की। वे मुख्यत: मुस्लिम सैनिको की टुकडिय़ां थीं। 15 और 22 फरवरी, 1915 को इनकी बगावत को बुरी तरह कुचल दिया गया। 41 भारतीय मुस्लिम सैनिक गोलियों से उड़ा दिए गए। 3 को फांसी हुई और बाकियों को या तो उम्र कैद या दूसरी कड़ी सजाएं सुनाई गईं।(http://sangramilehar.blogspot.com/2013/10/blog-post_11.html)

 

अमरीका, यूरोप, अफगानिस्तान और भारत में गदर आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोगों के नामों की सूची शामिल करते हुए डायरेक्टर इंटेलीजेंस ब्यूरो, गृह विभाग, भारत सरकार की ओर से सन 1934 में ‘गदर डायरेक्टरी’ जारी की गई थी। इस डायरेक्टरी में नंबर एस 44 (पृ. 267) पर उधम सिंह का नाम दर्ज है।

”एस-44 शेर सिंह उर्फ उदय सिंह, उर्फ फ्रैंक ब्राजील पुत्र टहल सिंह जट गांव सुनाम, पटियाला स्टेट, उसके अनुसार उसका पालन-पोषण खालसा कालेज अमृतसर से संबंधित सिख अनाथाश्रम में हुआ। उसने डेढ़ साल बसरा में और दो साल ब्रिटिश पूर्वी अफ्रीका में फौज की नौकरी की। इसके बाद वह कुछ महीनों के लिए वापस भारत आया और फिर प्रीतम सिंह के साथ लंदन के लिए रवाना हुआ और वे दोनों समुद्री मार्ग से मैक्सिको होकर संयुक्त राज्य अमरीका गए। उसने दो साल कैलिफोर्निया में काम किया और कुछ महीने डेटरोइट और शिकागो में काम किया और उसके बाद वह पूर्वी न्यू यार्क चला गया, जहां वह पांच साल रहा। वह रूस समेत कई यूरोपीय देशों में घूमा। अमरीका में निवास के दौरान वह गदर पार्टी के सम्पर्क में आया और इसकी शिक्षाओं से प्रभावित हुआ। वह ‘गदर की गूंज’ और गदर पार्टी की ओर से प्रकाशित अन्य राजद्रोही साहित्य पढ़ता था। अगस्त, 1927 में वह भारत पहुंचा। 30 अगस्त 1927 को अमृतसर में उसे गिरफ्तार किया गया, क्योंकि उस पर शक था कि उसके पास गैर कानूनी हथियार हैं। उसके पास से दो रिवाल्वर एक पिस्तौल और ‘गदर की गूंज’ की कुछ प्रतियां बरामद हुई। उस पर आर्मज एक्ट के सेक्शन 20 के तहत मुकद्दमा चला और उसको पांच साल की सख्त सजा हुई। उसने बयान दिया कि उसका मकसद यूरोपियनों को मारना था, जो भारतीयों पर शासन करते हैं और उसको बोल्शेविकों से पूरी हमदर्दी थी क्योंकि उनका मकसद भारत को विदेशी नियंत्रण से मुक्त करवाना था।’’

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