खबर – धर्मेंद्र कंवारी

हरियाणवी लघुकथा

शहर के बड्डे कारोबारी पै इनकम टैक्स की रेड पड़ी थी। एक रिपोर्टर सबेर तैए इनकम टैक्स की रेड पर नजर राख र्या था। आज सबरै तो इस चक्कर म्हं उसनै कलेवा भी नहीं करया। शाम नै फोटो अर आधे पेज की जानकारी गेल आफिस पहुंचा। एक चा मंगवाई अर उसनै पीके खबर घड़ण बैठग्या। नून तै रिपोर्टर का मोबाइल बाज्या।

रिपोर्टर (हैलो) – नमस्कार जी
संपादक का फोन आया था, नमस्कार का जवाब नहीं मिला
संपादक – क्या खबर है?
रिपोर्टर – सर, सर्राफ के यहां बड्डी रेड पड़ी सै। कई लाख का गोलमाल सै।
संपादक – आपके पास क्या प्रमाण है?
रिपोर्टर –  जी, रेड पड़ी है, मैंने पूरी जानकारी जुटाई है।
संपादक – मानहानि का केस होगा तो तुम भुगतोगे?
रिपोर्टर – जी…
संपादक – इस खबर को छोड़ो और खबर ये करो कि अक्षय तृतीया पर बाजार में क्या माहौल है? पता नहीं कहां ध्यान रहता है तुम्हारा?
फोन कटता है और रिपोर्टर कहता है… सुसरा…

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा ( अंक 8-9, नवम्बर 2016 से फरवरी 2017), पृ.- 120

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