धर्मेंद्र कंवारी – बिजली

हरियाणवी लघुकथा

एक – भाई इस सरकार नै तो आग्गै लोग एक बी बोट ना दें।
दूसरा – कत्ती नाश होर्या सै भाई, इन ससुरा नै न्यूं भी कोनी बेरा अक किस तरियां सरकार चलाणी सै।
टाबर – बाबू बिजळी आग्गी?
बाबू – रै तोल्ला सा छात्त पै जाकै तार गेर ले, सानी तो काट लेवां या सरकार तो सुसरी न्यूं ए चाल्लैगी।

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा ( अंक 8-9, नवम्बर 2016 से फरवरी 2017), पृ.- 120

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