कबीर -पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये

साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि।
औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक

पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये।
चरण – एक जाइनि2 से चार बरन3 भे, हाड़ मास जीव गूदा।
सुत परि दूजे नाम धराये, वाको करम न छूटा।।
कन्या जाति  जाति की बेचत6 , कौने जाति कहाये।
आप कन्या बेचन लागे, भारी दाम चढ़ाय।।
जहं लगि पाप अहै दुनिया में, सो सब कांध चढ़ाये।
कहै कबीर सुनो हो पंडित, घर चौरासी या छाय।।

  1. उजाला  करने वाला 2. योनि 3. वर्ण  4. सभी 5. अलग करना 6. दहेज प्रथा

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