पीड़ा का सन्तोष – सुशीला बहबलपुर

कविता

पीड़ाओं में जो पैदा हुए
पीड़ाओं में जिनका बचपन गुजरा
पीड़ाओं में ही रखे जिसने
जवानी की दहलीज पर कदम
पीड़ाओं में ही रहकर समझा
पीड़ाओं के कारण को
पीड़ाओं में रह लड़ना-सीखा
पीड़ाओं से छुटकारा पाने हेतु
पीड़ानाशक सूत्र दे, दूसरों को
खुद मरा सन्तोष की पीड़ा


स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (जुलाई-अगस्त 2016) पेज-29

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