स्टीफन हॉकिंग को याद करते हुए – सुनील कुमार

स्टीफन हॉकिंग

दुनिया के रहस्यों पर से पर्दा उठाने वाले अद्वितीय उद्भोधक महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को हाल ही में उनकी पुण्यतिथि पर दुनिया भर में याद किया गया। स्टीफन हॉकिंग एक विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, ब्रह्माण्ड विज्ञानी, लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान केन्द्र  के शोध निर्देशक थे। इनका  जन्म 8 जनवरी 1942 को ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड नगर में हुआ । हॉकिंग का जन्म  चिकित्सकों के एक परिवार में हुआ था। अक्टूबर 1959 में, 17 साल की उम्र में, उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड में अपनी विश्वविद्यालय की शिक्षा शुरू की । जहाँ उन्होंने भौतिकी में प्रथम श्रेणी बीए की डिग्री प्राप्त की । साल 1962 में, उन्होंने ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज में अपना स्नातक कार्य शुरू किया । जहां  1966 में, उन्होंने सामान्य सापेक्षता और ब्रह्मांड विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ व्यावहारिक गणित और सैद्धांतिक भौतिकी में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की । सन 1963 में मात्र 21 साल की उम्र में हॉकिंग को मोटर न्यूरॉन बीमारी के शुरुआती दौर में धीमी गति से बढ़ने वाली बीमारी का पता चला, जिसने धीरे-धीरे, दशकों तक उन्हें विकलांग बना दिया।  स्टीफन हॉकिंग को मोटर न्यूरोन नाम की बीमारी से हार नहीं मानी व जिजीविषा के साथ इससे ताउम्र लड़ते रहे । हालांकि इसमें शरीर के अधिकतर अंग काम करना बंद कर देते हैं । इस बीमारी से चलने-फिरने के साथ बोलने से भी लाचार हो गये थे। लेकिन स्टीफन की व्हील चेयर कुछ इस तरह बनी थी कि वो उनके बोलने को  समझ लेती थी । वह जो चाहते थे, वो लिखती भी थी। दूसरों से संपर्क भी साधती थी । इस व्हील चेयर को वो कार की तरह  चला सकते थे। स्टीफन हॉकिंग ने अपने लिए खासतौर पर बनाई गई इस कस्टम इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर का इस्तेमाल 1980 से शुरू किया. धीरे धीरे उनकी व्हीलचेयर से तमाम तकनीक जुड़ती गईं. जो हाई-टेक, कंप्यूटर जेनरेटेड थी. इसी के सहारे वो दुनियाभर से जुड़े भी रहते थे और अपने सारे काम भी कर लेते थे । अतः कहा जा सकता है कि ये दुनिया की सबसे स्मार्ट व्हील चेयर से परिपूर्ण थे।  हाकिंग की व्‍हीलचेयर में ऐसे इक्विपमेंट्स थे, जिनके जरिए वे विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में दुनिया को बताते थे. चेयर के साथ कम्प्यूटर और स्पीच सिंथेसाइजर लगा था, इसी के सहारे हाकिंग पूरी दुनिया से बातें करते थे। ये उनके इशारों और जबड़े के मूवमेंट को आवाज में बदलती थी ।

स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया। उन्हें 12 मानद डिग्रियाँ और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुये।स्टीफ़न हॉकिंग की पुस्तक-रूप में प्रकाशित कृति है ‘समय का संक्षिप्त इतिहास’। यह पुस्तक सन् 1988 में प्रकाशित हुई थी और अपनी तथ्यपरकता एवं वैज्ञानिकता के कारण इतनी लोकप्रिय हुई कि 10 वर्षों में इसकी दस लाख प्रतियाँ बिक गयीं। आज भी उसकी माँग बनी हुई है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है “ मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के सामने खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है। वे अपनी वैज्ञानिक व तार्किक दृष्टि के आधार पर बताया कि ना कोई ईश्वर है, ना स्वर्ग-नर्क और ना किस्मत जैसी कोई चीज़ है.।यह  विचार  विश्व के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के जो उन्होंने अपनी अंतिम पुस्तक ब्रीफ अनश्वर टू दी बिग क्वेशन  ‘ में दिए हैं.।  यह पुस्तक स्टीफन हॉकिंग की मृत्यु के बाद उनके परिवार ने प्रकाशित करवाई है । हॉकिंग का 76 वर्ष की आयु में 14 मार्च 2018 को कैम्ब्रिज में उनके घर पर निधन हो गया। विज्ञान, मनोरंजन, राजनीति और अन्य क्षेत्रों की हस्तियों ने उनके दुनिया के लिए योगदान की प्रशंसा की। उनकी मृत्यु पर ] गोनविले और कैयस कॉलेज का झंडा आधा झुका हुआ था और छात्रों और आगंतुकों द्वारा संवेदना की एक पुस्तक पर हस्ताक्षर किए गए थे।  दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में 2018 पैरालंपिक शीतकालीन खेलों के समापन समारोह में आईपीसी अध्यक्ष एंड्रयू पार्सन्स के समापन भाषण में हॉकिंग को श्रद्धांजलि दी गई ।उनका शारीरिक अंतिम संस्कार 31 मार्च 2018, को ग्रेट सेंट मैरी चर्च  कैम्ब्रिज में हुआ।

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