सम्पूर्ण जातक कथाएँ

जातक या जातक पालि या जातक कथाएँ बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का भाग है ।  जातक कथाओं को विश्व की प्राचीनतम लिखित कहानियों में गिना जाता है जिसमे लगभग 600 कहानियाँ संग्रह की गयी है। इन कथाओं मे मनोरंजन के माध्यम से नीति और धर्म को समझाने का प्रयास किया गया है।

चूंकि ‘जातक कथाएँ’ बुद्ध के सम्बन्धी कथाएँ है इसलिए अधिकतर कहानियों में वे ही प्रधान पात्र के रूप में चित्रित है। कहानी के वे स्वयं नायक है। कहीं-कहीं उनका स्थान एक साधारण पात्र के रूप में गौण है और कहीं-कहीं वे एक दर्शक के रूप में भी चित्रित किये गये हैं। प्रायः प्रत्येक कहानी का आरम्भ इस प्रकार होता है-‘‘एक समय राजा ब्रह्मदत्त के वाराणसी में राज्य करते समय (अतीते वाराणसिंय बह्मदत्ते रज्ज कारेन्ते) बोधिसत्व कुरंग मृग की योनि से उत्पन्न हुए अथवा … सिन्धु पार के घोड़ों के कुल में उत्पन्न हुए अथवा ….. बोधिसत्व ब्रह्मदत्त के अमात्य थे अथवा ..बोधिसत्व गोह की योनि सें उत्पन्न हुए आदि, आदि। इन कथाओं की निश्चित संख्या कितनी है, इसका निर्णय करना बड़ा कठिन है लेकिन लंका, बर्मा और सिआम में प्रचलित परम्परा के अनुसार जातक कथाओं की कुल संख्या 550 हैं । इन कथाओं की संख्या वर्तमान रूप में 547 मानी गयी है, पर यह संख्या भी केवल ऊपरी ही है । क्यूंकि ये सभी कथाएं गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित हैं इसलिए सभी कथाएं प्रायः उपदेशात्मक है। परन्तु उनका साहित्यिक रूप भी निखरा हुआ है। उपदेशात्मक होते हुए भी वे पूरे अर्थों में कलात्मक है। इन कथाओं का रूप लोक-साहित्य का भी है जिसमे पशु-पक्षियों आदि की कथाएँ भी है और मनुष्यों की भी है। इन कथाओं को मुख्यतः सात भागों मेंं वर्गीकरण किया है-

1. व्यावहारिक नीति-सम्बन्धी कथाएँ
2. पशुओं की कथाएँ
3. हास्य और विनोद से पूर्ण कथाएँ
4. रोमाञ्चकारी लम्बी कथाएँ या उपन्यास
5. नैतिक वर्णन
6. कथन मात्र, और
7. धार्मिक कथाएँ

जितने भी अभी प्रचलित बौद्ध जातक कथाएं अपभ्रंस के वाद जिस रूप में मिला हम यहाँ देने को कोशिश की है । समय के साथ अगर ज्यादा संग्रह कर सकें तो नीचे दिए गये लिंकों में देने को कोशिश करेंगे ।

  1. रुरु मृग -जातक कथा
  2. दो हंसों की कहानी -जातक कथा
  3. चाँद पर खरगोश -जातक कथा
  4. छद्दन्द हाथी -जातक कथा
  5. महाकपि -जातक कथा
  6. लक्खण मृग की -जातक कथा
  7. संत महिष -जातक कथा
  8. सीलवा हाथी -जातक कथा
  9. बुद्धिमान् वानर -जातक कथा
  10. सोने का हंस -जातक कथा
  11. महान मर्कट -जातक कथा
  12. महान् मत्स्य -जातक कथा
  13. कपिराज -जातक कथा
  14. सिंह और सियार -जातक कथा
  15. सोमदन्त -जातक कथा
  16. कौवों की कहानी -जातक कथा
  17. वानर-बन्धु -जातक कथा
  18. निग्रोध मृग -जातक कथा
  19. कालबाहु -जातक कथा
  20. नन्दीविसाल -जातक कथा
  21. उल्लू का राज्याभिषेक -जातक कथा
  22. श्राद्ध-संभोजन -जातक कथा
  23. बंदर का हृदय -जातक कथा
  24. बुद्धिमान् मुर्गा -जातक कथा
  25. व्याघ्री-कथा -जातक कथा
  26. कबूतर और कौवा -जातक कथा
  27. रोमक कबूतर -जातक कथा
  28. रुरदीय हिरण -जातक कथा
  29. कृतघ्न वानर -जातक कथा
  30. मूर्ख करे जब बुद्धिमानी का काम ! -जातक कथा
  31. कछुए की कहानी -जातक कथा
  32. सियार न्यायधीश -जातक कथा
  33. सपेरी और बंदर -जातक कथा
  34. चमड़े की धोती -जातक कथा
  35. दानव-केकड़ा -जातक कथा
  36. महिलामुख हाथी -जातक कथा
  37. विनीलक -जातक कथा
  38. वेस्सन्तर का त्याग -जातक कथा
  39. विधुर -जातक कथा
  40. क्रोध-विजयी चुल्लबोधि -जातक कथा
  41. कहानी कुशीनगर की -जातक कथा
  42. सहिष्णुता का व्रत -जातक कथा
  43. मातंग : अस्पृश्यता का पहला सेनानी -जातक कथा
  44. इसिसंग का प्रलोभन -जातक कथा
  45. शक्र की उड़ान -जातक कथा
  46. महाजनक का संयास -जातक कथा
  47. सुरा-कुंभ -जातक कथा
  48. सिवि का त्याग -जातक कथा
  49. दैत्य का संदूक -जातक कथा
  50. कुशल-ककड़ी -जातक कथा
  51. कंदरी और किन्नरा -जातक कथा
  52. घतकुमार -जातक कथा
  53. नाविक सुप्पारक -जातक कथा
  54. नागराज संखपाल -जातक कथा
  55. चंपेय्य नाग -जातक कथा
  56. बावेरु द्वीप -जातक कथा
  57. कुशल जुआरी -जातक कथा
  58. गूंगा राजकुमार -जातक कथा
  59. निश्छल गृहस्थ -जातक कथा
  60. मणिवाला साँप -जातक कथा
  61. आम चोर -जातक कथा
  62. पैरों के निशान पढ़ने वाला पुत्र -जातक कथा
  63. सुतसोम -जातक कथा
  64. सुदास -जातक कथा
  65. बौना तीरंदाज -जातक कथा
  66. पेट का दूत -जातक कथा
  67. ढोल बजाने वाले की कहानी -जातक कथा
  68. जानवरों की भाषा जानने वाला राजा -जातक कथा
  69. सुखबिहारी -जातक कथा
  70. साम -जातक कथा
  71. गौतम की बुद्धत्व प्राप्ति -जातक कथा
  72. गौतम बुद्ध की जन्म -जातक कथा
  73. महामाया का स्वप्न -जातक कथा
  74. असित -जातक कथा
  75. चार दृश्य -जातक कथा
  76. गौतम का गृह-त्याग -जातक कथा
  77. मार पर बुद्ध की विजय -जातक कथा
  78. बुद्ध का व्यक्तित्व -जातक कथा
  79. बुद्ध और नालागिरी हाथी -जातक कथा
  80. बालक कुमार कस्सप की -जातक कथा
  81. धम्म चक्र-पवत्तन -जातक कथा
  82. बुद्ध की अभिधर्म-देशना -जातक कथा
  83. राहुलमाता से बुद्ध की भेंट -जातक कथा
  84. सावत्थि -जातक कथा
  85. बुद्ध की यात्रा -जातक कथा
  86. परिनिब्बान -जातक कथा
  87. सुद्धोदन -जातक कथा
  88. सुजाता -जातक कथा
  89. सारिपुत्र -जातक कथा
  90. मोग्गलन -जातक कथा
  91. मार -जातक कथा
  92. बिम्बिसार -जातक कथा
  93. नंद कुमार -जातक कथा
  94. जनपद कल्याणी नंदा -जातक कथा
  95. जनपद कल्याणी की आध्यात्मिक यात्रा -जातक कथा
  96. फुस्स बुद्ध -जातक कथा
  97. विपस्सी बुद्ध -जातक कथा
  98. शिखि बुद्ध -जातक कथा
  99. वेस्सभू बुद्ध -जातक कथा
  100. ककुसन्ध बुद्ध -जातक कथा
  101. कोनगमन बुद्ध -जातक कथा
  102. कस्सप बुद्ध -जातक कथा
  103. मेत्रेयः भावी बुद्ध -जातक कथा

कृपया ध्यान दें:

बुद्ध के आठ महान मार्ग में कहीं भी झूठ, भ्रम और छल की स्थान नहीं । बुद्ध के नाम पे अनेक नैतिक कहानी बने और उनको बुद्ध के नाम पे नैतिक ज्ञान के तौर फैलाया गया । अगर कोई कहानी बुद्ध की सोच विरोधी है तो ये साफ़ साफ़ उनको नीचे दिखाने की साजिश और उनके विरोधी दुश्मनों का भ्रमित कहानी है । बुद्ध कभी भगवान, पुनर्जन्म और अवतार में विश्वास नहीं किया । बुद्ध की निर्वाण के वाद ही संगठित पुजारीवाद ने बौद्ध धर्म को अपभ्रंश और ध्वंस करने की शुरुआत कर दी थी । समय के साथ बौद्ध धर्म हीनजन(नीच लोग) और महाजन(महान लोग) में विभाजित कर दिया गया । उसके वाद ये विभाजित सेक्ट और भी टुकड़े होते चले गए । हीनयान को निम्न वर्ग(गरीबी) और महायान को उच्च वर्ग (अमीरी) भी कहा जाता है; हीनयान एक व्यक्त वादी धर्म था जिसका अर्थ कुछ जानकार “निम्न मार्ग” भी कहते हैं । हीनयान संप्रदाय के लोग बुद्ध की प्रमुख ज्ञानसम्पदा की परिवर्तन अथवा सुधार के विरोधी थे । यह बौद्ध धर्म के प्राचीन आदर्शों का ज्यों त्यों बनाए रखना चाहते थे । हीनयान संप्रदाय के सभी ग्रंथ पाली भाषा मे लिखे गए हैं । हीनयान बुद्ध जी की पूजा भगवान के रूप मे न करके बुद्ध जी को केवल बुद्धिजीवी, महापुरुष यानी इंसान ही मानते थे । हीनयान ही सिद्धार्था गौतम जी की असली शिक्षा थी । वैदिक वाले उनको विष्णु का अवतार बना के अपने मुर्तिबाद के छतरी के नीचे लाया और उनको भगवान बना के उनकी ब्योपारीकरण भी कर दिया । बुद्धिजीम असलियत में संगठित पुजारीवाद यानी ब्राह्मणवाद के शिकार होकर अपभ्रंश होता चला गया । हीनयान वाले मुर्तिको “बुद्धि” यानी “तर्क संगत सत्य ज्ञान” की प्रेरणा मानते हुए, यानी मूर्ति को केवल व्यक्तित्व की संज्ञान पैदा करने के लिए इस्तेमाल करते थे; इसीलिए मुर्ति के सामने मेडिटेसन यानी चित्त को स्थिर करने का योग अभ्यास करते थे; जब की ज्यादातर महायान वाले उनकी मूर्ति को भगवान मान के वैदिकों के जैसा पूजा करते हैं । महायान की ज्यादातर स्क्रिप्ट संस्कृत में लिखागया है यानी ये इस बात का सबूत है बुद्धिजीम की वैदिक करण की कोशिश की गयी । उसमे पुनः जन्म, अवतार, भगवान, देव, देवताओं, वैदिक भगवान जैसे इंद्र, ब्रम्हा, विष्णु, महेश्वर, स्वर्ग, नर्क, जैसे कांसेप्ट मिलाये गए और असली बुद्धिजीम को अपभ्रंस किया गया । जो भगवान को ही नहीं मानता वह अवतार को क्यों मानेगा? अगर अवतार में विश्वास नहीं तो वह क्यों पुनर्जन्म में विश्वास करेगा? महायान सिद्धार्था गौतम जी की यानी बुद्ध की विचार विरोधी आस्था है जिसको ब्राह्मणीकरण किया गया; बाद में ये दो हीनयान और महायान सखाओंसे अनेक बुद्धिजीम की साखायें बन गए और अब तरह तरह की बुद्धिजीम देखने को मिलते हैं जिसमें तंत्रयान एक है । तंत्रयान बाद में वज्रयान और सहजयान में विभाजित हुआ । जहां जहां बुद्धिजीम फैला था समय के साथ तरह तरह की सेक्ट बने जैसे तिबततियन बुद्धिजीम, जेन बुद्धिजीम इत्यादि इत्यादि । हीनयान संप्रदाय श्रीलंका, बर्मा, जावा आदि देशों मे फैला हुआ है । अनुगामियों का मानना है इन देशों में फैली हीनयान अपभ्रंस नहीं है जो की गलत है । बाद में यह संप्रदाय दो भागों मे विभाजित हो गया- वैभाष्क एवं सौत्रान्तिक । बुद्ध ने अपने ज्ञान दिया था ना कि उनकी ज्ञान की बाजार । अगर आपको उनकी दर्शन अच्छे लगें आप उनकी सिद्धान्तों का अनुगामी बने ना की उनके नाम पे बना संगठित पहचान और उनके उपासना पद्धत्तियोंकी । आपका ये जानना जरूरी है, असली बुद्धिस्ट ज्ञान सम्पदा अपभ्रशं होकर उसमें तरह तरह की वैदिक सोच जैसे अवतार, पुनर्जन्म, भगवान, देव/ देवताओं, वैदिक भगवान जैसे इंद्र, ब्रम्हा, विष्णु, महेश्वर/रूद्र, स्वर्ग, नर्क, इत्यादि सोच घोलागया है और उस को सदियों अपभ्रशं करके असली बुद्ध शिक्षाओं को भ्रमित किया जारहा है, और बुद्धिजीम को वैदिक छतरी के नीचे लाने की कोशिश हमेशा हो रही है । अगर आपको कोई भी बुद्धिस्ट स्क्रिप्चर में भगवान, मूर्त्तिवाद, अवतार, पुनर्जन्म, स्वर्ग, नर्क, चमत्कार, आलोकिक, भूत प्रेत, शैतान, जादू या काला जादू, हवन, वली, भोग/प्रसाद, व्रत, गंगा स्नान, छुआ छूत, अंधविश्वास, कुतर्क, हिंसा, अपराध, आस्था से जुड़ी सामाजिक बुराईयां इत्यादि इत्यादि जैसे वैदिक आस्था देखने को मिले आपको समझलेना होगा ये अपभ्रंस है । अगर ये सब आस्था बुद्ध को पसंद होता वह वैदिक दर्शन से अलग नहीं होते । बुद्ध के निर्वाण के वाद उनकी कही गयी सिक्ष्याओं को उनके अनुयायिओं के द्वारा संगृहीत कियागया था उन्हों ने कभी अपने हाथों में लिखित पाण्डुलिपि लिखकर नहीं गये थे जो उनकी लेख और शिक्षा का अपभ्रंस न हो पाये । महाजन सेक्ट बुद्ध की असली शिक्षा से अलग है और ये ज्यादातर ब्राह्मणी करण है जिसके ज्यादातर स्क्रिप्चर संस्कृत में ही मिलेंगे; जिसको वैदिकवादी छद्म बुद्धिस्ट सन्यासिओं ने हमेशा अपभ्रंस और नष्ट करते आ रहे हैं । मेत्रेयः भावी बुद्ध एक काल्पनिक चरित्र है जिसकी बुद्ध की सिक्ष्याओं से कोई सम्बद्ध नहीं बल्कि बुद्ध के नाम पे धूर्त्तों के द्वारा फैलाई गई अफवाएं है, जैसे वैदिक वाले विष्णु की कल्कि अवतार के वारे अफवाएं फैलाई हुई है । बुद्ध के सिखाये गए अष्टांग मार्ग से कोई भी बुद्ध बन सकता है ।

साभार – ओड़ीआकी

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