देस हरियाणा बैठक

24 अप्रैल 2022 को हिन्दी विभाग के संगोष्ठी कक्ष में देस हरियाणा पत्रिका की बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता श्री जयपाल जी ने और संचालन श्री विकास साल्याण जी ने किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य देस हरियाणा की भविष्य की रूपरेखा को सुनिश्चित करना और पत्रिका को किस तरह उन्नत बनाया जाए रहा। बैठक में 30 के करीब स्दस्यों ने हिस्सा लिया। पत्रिका को किस तरह और बेहतर बनाया जा सकता है इसके लिए सब ने अपने अनुभव और विचार प्रस्तुत किए।

देस हरियाणा परिवार


इस क्रम की शुरुआत डॉ. प्रदीप से हुई जिन्होनें बताया कि “देस हरियाणा पत्रिका का प्रकाशित होना ही हमारे लिए गर्व की बात है। देस हरियाणा आज के मनुष्य के मूल्यों को बचाता है। लोगों को सोचने के लिए चेतना को पैदा करता है ताकि वे अपने सही गलत के बारे में सोच सकें। अगर सभी लोग संविधान की प्रस्तावना का सही ढंग से पालन कर लें तो भारत अपने आप के किसी स्वर्ग से कम नहीं होगा और देस हरियाणा भारतीय संविधान की मूल भावना पर काम कर रही है। यहीं से हम प्रेरणा ग्रहण करते हैं।”
इसके बाद सुरेंद्र पाल जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि “देस हरियाणा अपने आप में विभिन्न विषयों को संजोये हुए होती है। पत्रिका अपने विशेषाकों के द्वारा पाठकों को गहनतम ज्ञान प्रदान करती है।”
इसके बाद प्रोफेसर सुभाष ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “समय के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदलती है, कोरोना के बाद का समय हर किसी के लिए उतार चढाव को समय है। कोरोना के कारण शिक्षण पद्धति में भी काफी बदलाव देखने को मिला है, ऐसे में हमें भी पत्रिका का स्वरूप बदलने की जरूरत है। हमारा काम सिर्फ देस हरियाणा पत्रिका को प्रकाशित करवाना नहीं है बल्कि शोषितों जैसे दलित, किसान, महिलाओं आदि को जागृत करना है और हरियाणा के ऩए लेखकों को प्रोत्साहित करना है। देस हरियाणा हर वे कार्य करती है जिस से आम जनता को अंधविश्वास से बाहर निकाला जा सके।”
इसके बाद मनोज जी ने अपनी बात को संक्षिप्त में कहते हुए कहा कि “देस हरियाणा अपने आप में किसी क्रांति से कम नहीं है। इस पत्रिका का मूल कार्य हरियाणा में हर प्रकार की जड़ता को खत्म करना है।”
श्री विकास साल्याण जी ने बताया कि “पत्रिकाएं हमेशा से ही जन मुद्दों को उठाती रही हैं और खोए हुए साहित्येतिहास को सामने लाती रही हैं। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य समाज में वैचारिक क्रांति लाना है जिससे की रैदास, कबीर, नानक आदि महापुरुषों के बेगमपुरा की स्थापना की जा सके। देस हरियाणा जातिवाद, भेदभाव, शोषण आदि को खत्म करने का विचार है जिसे हमें जन-जन तक पहुंचाना चाहिए।”
डॉ. सुनील थुआ जी ने बताया की “देस हरियाणा से ही हमारे व्यक्तित्व का विकास हुआ है और इसकी ही प्रेरणा से हम आज गांवों में जाकर वैचारिक गोष्ठियों का आयोजन करते हैं ताकि सामाजिक विद्वेष भावना को खत्म किया जा सके”
योगेश ने बताया की “देस हरियाणा से मेरे व्यक्तित्व का विकास हुआ है। मैनें देस हरियाणा में काम करते हुए अनेक तरह की प्रतिभाओं को प्राप्त किया है।”
गुरदीप भोसले ने बताया कि “देस हरियाणा अपने आप में एक क्रांति का प्रतिबिंब है। हम जहाँ भी गोष्ठियाँ करते हैं हमने लोगों की आंखों में क्रांति का प्रकाश देखा है, वो बदलाव चाहते हैं। देस हरियाणा का चर्चा आजकल गांव गाव में फैल रहा है, लोग बात करते हैं और देस हरियाणा को अपने बदलाव के पुरोधा के रूप में देखते हैं। इसे हम अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इसे और आगे तक लेके जाना है।”
गुरमीत बिढ़ाण ने कहा कि “देस हरियाणा अपने आप में एक समाजसुधार का कार्य करने का एक मंच है जिसके जरिये हम अपने व्यक्तित्व और समाज का सुधार कर सकते हैं। यह वैचारिक क्रांति का मंच है।”
राजकुमार जांगड़ा जी ने अपनी बात में बताया कि “आज के इस सांप्रदियकता के दौर में चुप बैठने से काम नहीं चलेगा। अगर आपको अपनी बात दूसरों तक पहुंचानी है तो कभी भी अपनी बात कहने से ना कतराएँ। आज के समय हरियाणा में लेखक देस हरियाणा को अपना मंच समझते हैं और हमें जनता को सांस्कृति से जोड़ने की जरूरत है।”
श्री नरेश सैनी जी ने बताया कि “देस हरियाणा सभी पत्रिकाओं में विशिष्ट स्थान रखती है। यह जन मुद्दों और खोए हुए इतिहास को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करती है।”
इसी कड़ी में श्री अरुण कहैरबा जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि “देस हरियाणा की मुख्य विशेषता यह है कि यह लोगों को वैचारिक दृष्टि प्रदान करती है और भविष्य में भी हम लोगों के बीच जाकर उन्हे जागृत करने का काम करते रहेंगे। पत्रिका में बहुत सारी विषय वस्तु ऐसी होती है जिसे विद्यार्थी बड़े चाव से पढ़ते हें चाहे वह कविता हों या फिर उनके पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री।”
हिन्दी विभाग के शोधार्थी नरेश दहिया जी ने कहा कि “देस हरियाणा अच्छे पाठकों को जन्म देती है। यह हमारी वैचारिक दृष्टि को निखारती है और नई चेतना को पैदा करती है। हमें चाहिए कि हम देस हरियाणा को सभी तक पहुंचाने में अपना योगदान दें।”
डॉ. राजेश कासनियां ने बताया कि “देस हरियाणा की गोष्ठियों का श्रोताओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हमने देस हरियाणा से ही बहुत कुछ सीखा है और इस ज्ञान को हम अपने बच्चों तक पहुंचा कर इसको सार्थकता प्रदान करेंगे।”
इसी क्रम में सतनाम जी ने कहा कि “आज के समय में हमें संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरुरत है। हम अपने धर्म ग्रंथों से इसे ग्रहण कर सकते हैं। हमें अपने लोकल गॉड्स के इतिहास को विस्तार देने की जरूरत है।”
छात्रा संजना ने बताया कि “देस हरियाणा जातिवाद को तोड़ने में प्रयासरत है ताकि देस में बंधुता और भाईचारा बनाया जा सके। ताकि भविष्य में लोगों को जातिवाद का शिकार न बनना पड़े और सबको समान अवसर मिल सके।”
अंत में अध्यक्ष महोदय श्री जयपाल जी ने बैठक में शिरकत करने पर सबका अभिवादन किया और कहा कि सभी तक देस हरियाणा पत्रिका पहुंचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। पत्रिका गावों शहरों में जा जाकर वैचारिक क्रांति करती है।”

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