कविता – संघर्ष और आगे बढ़ने का जज्बा पैदा करती है – जयपाल

दिनांक 24/10/2021 को हिन्दी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में साहित्य परिषद् हिन्दी विभाग और देस हरियाणा पत्रिका के सहयोग से ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

दिनांक 24/10/2021 को हिन्दी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में साहित्य परिषद् हिन्दी विभाग और देस हरियाणा पत्रिका के सहयोग से ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ कवि और लेखक श्री जयपाल जी ने मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की। हिन्दी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसबीर जी ने कार्यक्रम का आरंभ करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और मुख्य वक्ता का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग की विद्यार्थी अनु राठी ने किया। उसके पश्चात हिन्दी विभाग के विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया। जिसमें एकता, रजत, हेमवती, ईशा, विजेन्द्र, प्रिया ने भाग लिया।

मुख्य वक्ता जयपाल जी ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा, शुरुआत में कविता अपने संघर्ष से निकलती है। परन्तु धीरे-धीरे साहित्यकार समाज की पीड़ा को अपना बनाने लग जाता है। शुरुआत में कविता करुणा से पैदा होती है। परन्तु आज की कविता अपने होने का और खड़े होने का जज्बा पैदा करती है। कई बार सवाल उठता है कि समाज में एक लेखक की क्या भूमिका होती है? जिस प्रकार एक ईमारत को बनाने में अलग-अलग कार्यक्षेत्र के लोग जैसे मिस्त्री, मजदूर आदि अपने काम द्वारा ईमारत का निर्माण करते है उसी प्रकार साहित्यकार और कलाकार भी समाज में अनेक जटिल समस्याओं को सरलीकरण के साथ समाज के मध्य प्रस्तुत करता है और समाज में एक परिवर्तन का वैचारिक माहौल बनाता है और समाज को बदलने में लेखकों का विशेष योगदान होता है। सभी वर्ग के व्यक्तियों से समाज बनता है। अच्छी सोच से समाज आगे बढ़ता है। जयपाल जी ने रचनाकारों के दायित्व को बताते हुए कहा कि हमें लिखने से पहले समाज की संकीर्ण और रूढिवादी सोच, समाज को और समाज के लोगों को पीछे ले जाने वाले विचारों को पहचानना आवश्यक है और फिर उस विषय को आलोचनात्मक नजरिए से समाज के मध्य प्रस्तुत करना ही रचनाकार का मुख्य कार्य होता है। ये आड़म्बर और रुढ़ियाँ आज भी बच्चों की दृष्टियों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। 

रचनाकार और कलाकार के पास अपनी रचना और कलाकृति बनाने के लिए कोई सूत्र नही होता और न ही उसको सिखाया जा सकता, वह केवल अपने मन से लिखता, पढ़ता जाता है।

लेखक जयपाल ने अंत में अपनी कविताओं का पाठ किया और हिन्दी विभाग के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को निरन्तर लिखने और निड़रता से अपनी बात कहने का संदेश दिया। उसके पश्चात विद्यार्थियों ने लेखक से सवाल-जवाब किए। 

हिन्दी विभाग परिवार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र

इस समीक्षा गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए देस हरियाणा पत्रिका के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र  ने    लेखक जयपाल की कविता सुनाते हुए कहा कि साहित्यकार न केवल लिखने से पहले ही समाज के दर्द को झेलता है बल्कि उसे लिखने के दौरान भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण सवाल होता है साहित्य के सम्प्रेषण का। एक अच्छी कविता का यही लक्षण होता है कि जो बात लेखक ने कही है वह पाठक तक पहुंची या नहीं। जयपाल जी की कविताओं का यह मुख्य गुण है कि वह आसानी से पाठकों के हृदय को छू जाती है। कविता या साहित्य उसी विषय को लेकर लिखा जाता है जिस बात या विषय को आसानी से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है। डॉ. ओमप्रकाश करुणेश ने कार्यक्रम में पहुँचे सभी अतिथियों और विद्यार्थियों का धन्यवाद किया। इस मौके पर बाल साहित्यकार बलदेव सिंह मेहरोक, कवि हरपाल गाफिल, ग़ज़लकार मंजीत भोला, हिन्दी विभाग के प्राध्यापक विकास साल्याण, ब्रजपाल खोखर, हिन्दी विभाग के शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद थे।

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