रजनी तिलक

नाचीज- रजनी तिलक

रजनी तिलक
औरत होने की वजह से 
बहुत कुछ झेलना पड़ता है 
रात को दिन, दिन को रात 
सूरज को चांद कहना पड़ता है। 

औरत जो खुद को इंसान समझे 
तो दुनिया खिलाफ हो जाती है, 
समाज तूफान ले आता है 
परिवार सहम जाता है। 

औरत तूफान पर चलती है 
घृणा की ओढ़नी ओढ़ती है 
क्या फर्क पड़ता है। 
कोख में जीवन रखती है 
औरत जो नाचीज होती है।

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