एक मुन्ने की अभिलाषा – नफीस अहमद ‘मुबारक’

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 कविता

बाप लिखवादे मियरो नाम,
स्कूल में पढण कू जाउंगों।
मैं करूगों कड़ी मिहनत बाप ,
स्कूल में फस्र्ट आउंगों।।

बेकदइन बकरीन ने,
मैं चराणकू नही जाउगों।
दिवादे कापी किताब ,
स्कूल में पढण कू जाउंगों। ।

खुद पढ़-लिख के नी मैं, बाप ,
गरीबन ने घर जा के नी पढाउंगों।
खत्म होवे दहेज प्रथा ,
नूं सबन्ने समझाउंगों।।

अनपढता है करवांउ खत्म ,
घर-घर ज्ञान दीप जलांउगों।
पढ़ाओ अपणा बालकन ने ,
नूं घर-घर जाके समझाउंगों।।

करूगों गरीबन कि सेवा ,
अपणो फर्ज निभाउंगों।
करूगों दिल सू पढ़ाई ,
मैं अच्छो इन्सान बणजाउगों।।

और कुछ बी ना बाप मैं,
एक फौजी जरूर बणजाउंगों ।
करूगों वतन की रक्षा, मैं,
दुश्मन है मार भगाउंगों।।

रब ने चाही जे बाप ,
मैं सबका मन ने करजाउंगों।
करूंगो काम इमानदारी सू,
नूं अनोखो काम कर जाउंगों।।

स्रोत- सं. देस हरियाणा (मई-जून 2016), पेज- 16

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