धरती बिन कोये धरती कारण धरै गये धार पै – राजेश दलाल

रागनी


धरती बिन कोये धरती कारण धरै गये धार पै
भूखमरी की भेंट चढे कोये धन की मारो-मार पै

भूमि बिना बेचारा होज्या ना हो ठेल-ठिकाणा-ठोस
दो गठड़ी पै हांड होज्या पांच-सात-दस-बारहा कोस
पाड्या पड़ाया न्यार फैंक दे दाती-पल्ली लेवैं खोस
क्यूकर डाटै झाल बदन की उठ जोर सुनामी जोश
पटक-पटक सिर रोणा हो सै इस बे-तुकी हार पै
वो भी चाहवै फोरड़ रिंगै ट्रेलीयां की लार पै

भूमिहीन तै मरे सो मरे धरती आळे भी हुऐ बिराण
मां-जायां के चलैं मुकदमें, हक तै बाहर बिठा दी बाहण
बाप काट दिया कस्सी तैं कितै मारैं गंडासी लहू-लूहाण
शास्त्री का नारा डोब्या जय जवान जय किसान
हथकड़ी लग्या पूत का फोटो फस्ट पेज अखबार पै
भाई चारे न छुटा लिया फेर दाब दई सरकार पै

भूखमरी का रोग सूखणा जिसकै लागै वो जाणै
आंख्यां आगै बाळक बिळकैं के हालात ल्हको जाणै
आसंग और आसार खत्म हों माणस करणा छोह जाणै
मामूली बिमारी भी अडै़ काळ की घण्टी हो जाणै
लाडो पड़ी बेहोश थी उसकी एक सो तीन बुखार पै
भाजै लूज कै ले कै आया दो सौ रूपये यार पै

पांचो आंगळी घी मैं जिनकी वे भी कहरे हाय मरगे
माया ठगणी जोर जमा गी नीत कोबळी करगे
दो नम्बर के अड्डे-सड्डे सारै ठइये धरगे
माल गोदाम बैंक सड़ै सै लूट-लूट कै भरगे
इब किस पार्टी का टिकट लेवां आज मीटिंग इस विचार पै
राजेश कह लात मारद्यो इसां के रोजगार पै

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.