एस.एस.पंवार की पांच हरियाणवी-राजस्थानी कविताएं

एस.एस.पंवार
जन्म- 19 अप्रैल 1990
फतेहाबाद के पीली मंदोरी गांव में जन्म। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोतर। प्रिंट और टी.वी. पत्रकारिता में तीन साल काम करने के उपरांत फिलहाल हिसार के दयानंद पी जी कॉलेज में बतौर सहायक प्रोफेसर (जनसंचार) कार्यरत।
कथा-समय, आजकल, कथेसर, दोआबा एवं दस्तक सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं और लेख प्रकाशित। पहली कहानी ‘अधुरी कहानी’ नाम से साल 2013 में हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका ‘कथा समय’ में प्रकाशित व पहली कविता 2009 में हरियाणा साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘दस्तक’ में प्रकाशित।

एस.एस.पंवार

 माउ

 माउ रामायण देखै
माउ बरत करै
माउ घर म्ह जिग्यां-जिग्यां लागेड़ा
टांटियां गा छत्ता तोड़ै
बांगो घर उजाडै,
 
समझ कोन आवै घर उजाड़न आरा सैंस्कार
रामायण सिखावै'क बरत ? 
 
माउ ओळमो'ईज दय 
कै बिंगा पोता बियूँ दूर होग्या
भाई बानै उरलै घरे कोनी आण दे
माउ जिनावरां गा बचिया रुळावै
अब थे'ई बताओ कुकर रेअसी
माउ गा बचिया माउ कनै !

माय स्वीट होम 

घणा ई सुणा लागो
फेसबुक माथै घर गी फोटू लगाय'र 
बीं पर my sweet home  लिखता
 
बिता ईज स्वीट होम टांटिया गा छता होवै
 
बिता ईज स्वीट होम सांपां गा बिल होवै
बिता ईज स्वीट होम चिड़िया गा आलणा'र दरख़्त हुवै
बिता ईज स्वीट होम
माकडां गा जाळ हुवै
जिकां गी लास पर थे पक्का घर बणाये बैठ्या हो।

सांप मारण रो पुन्न

 सांप पेट घीन्सतो फिरै
अर बो थानै दुखी लागै
तो थारै बाप नै मार दयो
बो कुण सालां'उ बीमार है
अर सरीर घीन्सतो फिरै
भाल कोनी हुवै बो 
अर मारण रो पुन हुसी।

 कवि 

  जे कवि हो, अर थारो घर चिमका मारै
कोई जी-जिनावर बठै आसरो कोन लेय सकै
थे टांटियां'गा छत्ता तोड़ो, 
माकड़ मारो, कबूतर उडाओ भई अ बीन्ठ न करदे
आलणो बणावती चिड़ी उडाओ
तो म्हनै थारै कवि होण पर संदेह है

घर म्ह 

 घर म्ह एक कोठो तो इस्यो होणो ई चाईजै
जठै चिड़ी आलणो कर सकै
टांटिया अर भिरडां छत्ता बणाय सकै
माकड़ जाळा कर सकै 
अर गिलारी जठै इंडा देयर बच्चा पाळ सकै

One comment

  • सुभाष says:

    सौणी कवितावां. आपणी मां बोली सबतै प्यारी.

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