ईद मुबारक

एक दूजे को गले लगाएँ
मिलकर गीत प्यार के गाएँ
वैरभाव को छोड़ के पीछे 
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।

ईद सिखाती गले लगाना
सबको अपना मीत बनाना
मन की कटुता को बिसराएँ
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।
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आती है जब ईद निराली
सलमा, कम्मो, मुन्नी, लाली
खीर-सेवइयां रज-रज खाएँ
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।
बाज़ारों में रौनक आती
दादी खेल खिलौने लाती
बालक फूले नहीं समाएँ
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।
राम बधाई देने आता
रहिमन संग मिठाई खाता
दोनों खड़े गली में गाएँ
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।
जितने भी हैं दर्द हमारे
मिलकर बाँटें सुख-दुख सारे
एक-दूजे का साथ निभाएँ
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।
कौन है हिन्दू कौन मुसलमां
एक हैं आखिर हम सब इन्सां
मज़हब पर न लड़ें-लड़ाएं
आओ हम-तुम ईद मनाएँ।।

-अविनाश सैनी

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