कविता – जयपाल

कविता खोजती है हमारे आकाश के नए रास्ते
कविता तोड़ती है हमारे रास्तों की सीमाएं
कविता सौंपती है हमें हमारे पंख
कविता बोलती है धीरे-धीरे चुपचाप
कविता देख लेती है हमारी आंखों में दूर-दूर तक बिखरे स्वप्न
कविता तलाश लेती है गुमशुदा चीजों के टूटे हुए रिश्ते
कविता सुन लेती है दरवाजे के बाहर खड़े समय की पदचाप
कविता लड़ती है विचारों के अंधकूप से
कविता लड़ती है भावनाओं की बंद गुफाओं से
कविता तोड़ती है बर्बरता की आदिम प्रतिमाएं
कविता चलती है समय के साथ
रहती है समय से आगे

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