सुशीला बहबलपुर 

अन्त मंथन

ये आबो हवा
बेचैन सी लगती है
मुझे आज
रूह हर शख्स की इस शहर में
बेदम सी लगती है
मुझे आज
लगता है खो गया है।
उसका कुछ
वह चाहता है पाना
फिर से बहुत कुछ
पर देता नहीं दिखाई
उसे कोई चिराग
अपने आस-पास
अब वह ढूंढ़ रहा है
कोई चिंगारी
अपने ही अंदर।
संपर्क – 94681-68895

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