हमें लिखो – ओम प्रकाश करुणेश

हमें लिखो

स्याह न हो
आने वाले दिन
कवि ! इन दिनों के बारे में जरूर लिखो
सबको मिले न्याय
और सब हो अलहादकारी
भेदभाव मिटे, कवि कुछ ऐसा लिखो
कुछ इस तरह गुनगुनाओ
कि होठों में ही दबी न रह जाए
मजलूमों की आवाज
गाओ अब इनके झमेले
कवि अब ऐसे गीत सुनाओ
तुफां उठे दिलों में हमारे
आंखों से खूं के आसूं बरसाओ
ये जुल्म करने वाले बदलें
न रहे इस धरा पर
मनुष्यता का ऐसा गीत सुनाओ
कवि कुछ ऐसा लिखो
कि आंख हमारी खुल जाएं।