हरियाणा सृजन उत्सव – सांस्कृतिककर्मियों ने बिखेरे रंग

 कपिल बतरा

पेंटिंग व पोस्टर मेकिंग स्पर्धा  23 फरवरी 2018 को हरियाणा सृजन उत्सव-2 के पहले दिन सुबह के सत्र में ‘देस हरियाणा, बदलता हरियाणा’ विषय पर पेंटिंग व पोस्टर मेकिंग स्पर्धा आयोजित की गई। इस स्पर्धा में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से स्कूली बच्चों से लेकर महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ-साथ स्वतंत्र चित्रकार भाग लेने पहुँचे थे। नवोदित चित्रकारों और कलाकारों ने ‘हरियाणा की प्राकृतिक छटा व हरियाली’, ‘लहलहाते खेत’ ‘किसानों की स्थिति’, ‘सामाजिक कुरीतियां’, ‘हरियाणवी संस्कृति’, ‘जन–जीवन’, ‘डिजिटल होता हरियाणा’, ‘विश्व विजेता सुन्दरी मानुषी छिल्लर’, ‘नारी सशक्तिकरण’, ‘शिक्षित नारी-समृद्ध नारी’, ‘साक्षरता अभियान’, ‘बढ़ता लिंगानुपात’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘घूँघट छोड़ों-दुनिया देखो’ ‘बदलता हरियाणा’, ‘हमारे पहलवानों को दम-ख़म’, ‘खिलाड़ियों की प्रतिभा’, ‘कल्चर और एग्रीकल्चर के बीच संतुलन’ आदि विषयों को अपनी चित्रकारी के ज़रिए दर्शाया। रोहतक के गाँधी स्कूल (सेक्टर-4 के पार्क में खुले में लगता है) से फ़िज़ा (10 वर्षीय), बबिता(10),  शिवानी (11), जितेन्द्र(13), सकरुद्दीन(13), क्रांति (13) व इनके शिक्षक विजय(25) ने अपनी प्रतिभा दिखाई।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग से आये विद्यार्थियों में पूर्वा, विक्रांत, सीता, मोहन, प्रतिमा, सोनू, अंशिका, सोनिका, हार्दिक, भावना, अनामिका, अभिषेक, शुभम, साक्षी, नेहा, निखिल, साक्षी व गार्गी प्रकाशन दिल्ली से स्वाति ने भी इस प्रतिस्पर्धा में भाग लिया। प्रथम स्थान पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के छात्र रणजीत सिंह ने, द्वितीय स्थान पर इसी विभाग से छात्र सोनू गहलावत व तृतीय स्थान पर अनूप ने प्राप्त किया। वहीं, प्रोत्साहन पुरुस्कार स्नेहा पटेल, गणेश कुमार व कर्तव्य को मिला।

 “मेरी रचना यात्रा” कार्यक्रम में लेखक निंदर घुगियाणवी ने अपनी ज़िन्दगी के रचनात्मक अनुभव सांझा किये। उन्होंने 49 किताबें लिखी हैं। सबसे अधिक लोकप्रियता उनकी किताब “मैं था जज का अर्दली” से हासिल हुई। उन्होंने अपने उस्ताद श्री लालचंद यमला जट को याद करके तुम्बी पर गीतों की प्रस्तुति दी। सोहनी-महिवाल के किस्से पर भी गीत सुनाया।

नाट्य प्रस्तुतियां – एक्शन थिएटर ग्रुप, रोहतक द्वारा नाटक “आत्मकथा’’ का मंचन किया गया। इस नाटक में कलाकारों ने महिला किसानों की जीवन की व्यथा को दर्शाया। नाटक के लेखक व निर्देशक दुष्यंत कुमार ने बताया कि हमारे समाज में महिला किसानों के श्रम को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। वे पुरुष प्रधान समाज में अपनी बात तक नहीं कह पाती। ‘आत्मकथा’ नाटक में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि “जब भी महिला किसानों के श्रम की क़ीमत लगाई जायेगी उस दिन इतिहास की सबसे बड़ी चोरी पकड़ी जाएगी। नाटक का उद्देश्य महिलाओं को उनकी मेहनत का श्रेय दिलाना है। मुनाफ़ा दुष्यंत कुमार का कहना था कि इस दुनिया की ज़मीन पर आधी आबादी महिला वर्ग है जो दिन-रात मेहनत करती है लेकिन इसी ज़मीन पर उसका मालिकाना हक महज 3 से 4 प्रतिशत ही है। वहीं, नाटक किसानों की आत्महत्या के मुद्दे को भी उठाता है। किसानों को अपने उत्पादों का तीन गुना क़ीमत भी नहीं मिल पाती जबकि मुनाफ़ाखोर तीस गुना मुनाफ़ा खा रहे हैं।  नाटक की परिकल्पना, संगीत व प्रकाश व्यवस्था निर्देशक दुष्यंत कुमार द्वारा की गई। नाटक में सुरेन्द्र, ज्ञानेश, मनीषा व दीपा ने अभिनय किया।

जन नाट्य मंच, कुरुक्षेत्र की टीम द्वारा “रज़िया की डायरी” नाटक का मंचन किया गया। नाटक के ज़रिए कलाकारों ने भारत के बंटवारे के दौरान हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे को दर्शाया। नाटक का निर्देशन अमित कुमार ने किया।

त्यागी आर्ट ग्रुप – त्यागी आर्ट ग्रुप ने अंधेर नगरी, चौपट राजा नाटक का मंचन किया जिसमें वर्तमान संदर्भों को जोड़ते हुए सामाजिक कुरीतियों व बाबाओं पर तीखे कटाक्ष किए और दर्शकों का मन मोह लिया। त्यागी आर्ट ग्रुप के सृजनकर्मियों व कलाकारों ने गीत व लोकगीतों के जरिये सांस्कृतिक उर्जा का संचार किया।

पथ सोसायटी – रोहतक के बाल कलाकारों ने कठपुतलियों के जरिये अपनी गंभीर प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक किया।

सृजन यात्रा – 24 फरवरी को सुबह सैनी धर्मशाला से सृजन यात्रा निकली गई। इस यात्रा में हरियाणा व अन्य प्रदेशों से आये सृजनकर्मी शामिल हुए। सृजनकर्मियों ने सृजन यात्रा के माध्यम से रचनात्मक व सृजनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का सन्देश दिया।

रागनी गायन – नवोदित लोक कलाकार गीता सिंह ने रागनी प्रस्तुत की। उनकी गायी रागनी “भगत सिंह कदै तेरा जी घबरा ज्या बंद मकान मैं” ने दर्शकों भगत सिंह व उनके साथियों के त्याग और बलिदान की याद दिलाई। अविनाश ने “जुगनी…” गीत की प्रस्तुति दी। मौलाना अल्ताफ़ हुसैन हाली की ग़ज़ल भी कार्यक्रम के दौरान सुनाई गई।

प्रदर्शनियां – सृजन उत्सव के दौरान विभिन्न संस्थाओं द्वारा फ़ोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस अवसर पर आयोजित पुस्तक मेले में ‘हरियाणा विज्ञान मंच’, ‘जन चेतना प्रकाशन’, ‘अभियान पत्रिका’, ‘रेतपथ’, ‘पत्रिका, गार्गी प्रकाशन’ (दिल्ली) की ओर से बुक स्टाल लगाये गये।

 

Related Posts

Advertisements