पीछा करो उनका

बड़े चतुर हैं वे
गजब के वाचाल और जादूगर
रूमाल झटकते हैं
तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां
खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ
और आसमान भर जाता है पतंगों से
हमें दिखाई नहीं देती उनकी अदृश्य डोर
उनकी बातें बहुत लुभावनी
और मुस्कान इतनी ठोस
कि हम अकबका कर
सभी को सच मान लेते हैं

इसके पहले कि वे
हमेशा के लिए बैठ जाएं हमारे कंधों पर
और बंदूक चलाकर हवा में जता सकें अपनी जीत की खुशी
गौर करो उनकी बिछाई हुई बिसात पर
उनकी सधी हुई चालों को पकड़ो
और पीछा करो उनका

ब्रजेश कृष्ण

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