पूंजीवाद को संभावित विद्रोहों से है गंभीर खतरा – पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

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  • रघुराम राजन ने कहा कि समाज में संभावित विद्रोहकी स्थिति
  • लोगों को अवसर नहीं मिल पाने के कारण पूंजीवाद खतरे में
  • अवसर नहीं मिल पाने से पूंजीवाद के खिलाफ होता है विद्रोह
  • 2008 के आर्थिक संकट से भी बड़ा होगा आने वाला संकट

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जताते हुए कहा है कि पूंजीवाद को ‘गंभीर खतरा’ है। यह बाते राजन ने बिबिसी रेडियो 4 टूडे द्वारा लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहे।

उन्होंने कहा कि सरकारों को अर्ध व्यवस्था पर ध्यान देते हुए समाज में फैली असमानता की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। जब भी ऐसा होता है तो लोग पूंजीवाद के खिलाफ विद्रोह करते हैं। मेरा मानना है कि पूंजीवाद गंभीर खतरे में है क्योंकि अब आम लोगों को इसका लाभ मिलना बंद हो गया है, जब ऐसा होता है तो लोग विद्रोह करते हैं।

उनका कहना था कि 2008 के विश्व व्यापी आर्थिक संकट के बाद हालात बदले हैं और साधारण शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरियां तलाशना मुश्किल हो गया है।

“ये दुर्भाग्य की बात है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था और वैश्विक सूचना व्यवस्था का असर जिन समुदायों पर पड़ा, वही समुदाय थे जिनके लिए शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती गई, जिनमें अपराध बढ़ता गया और सामाजिक बीमारियां भी बढ़ती गईं. ये समुदाय अपने लोगों को आने वाली वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार नहीं कर पाया.”

देने में नाकाम रहा है.

उन्होंने कहा, “सभी को पूंजीवाद ने समान मौक़े नहीं दिए और सच कहें तो जो लोग इसका ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं, उनकी स्थिति बेहद ख़राब है.”

उन्होंने कहा, “जब उत्पादन के सभी साधनों का समाजीकरण कर देते हैं तो अधिनायकवाद का उदय होता है.”

“आपको संतुलन चाहिए जिसमें आप चुनाव करने का मौक़ा मिले- आपको अधिक मौक़े कैसे मिले ये सोचना होगा.”

रघु राम राजन आरबीआई के पूर्व गवर्नर और विश्व मुद्रा कोष में अर्थशास्त्री रह चुके है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में वह इंग्लैंड के प्रमुख बैंक – बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर का पदभार संभाल सकते हैं वर्तमान में वह शिकागो विश्वविद्याल्य में प्रोफेसर हैं।

ज्ञात रहे कि 2008 के विश्व आर्थिक संकट ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इसके बाद से संकट लगातार जारी है। फिर से बड़े आर्थिक संकट की बादल दुनिया पर मंडराने लगे हैं।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक संकट के बाद से दुनिया भर में क़र्ज़ 50 फ़ीसद बढ़ा है और इसके साथ वैश्विक तौर पर उधार लेने वाली व्यवस्था में गिरावट आशंका है.

इस रिपोर्ट के अनुसार 2008 के बाद से देश की सरकारों पर क़र्ज़ 77 फ़ीसदी बढ़ा है जबकि कंपनियों पर क़र्ज़ 51 फ़ीसदी तक बढ़ा है.

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला वैश्विक आर्थिक संकट साल 2008 वाले संकट की तुलना में कम गंभीर होगा.

PHOTOGRAPH © STEVEN GREAVES/CORBIS

 

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