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टैटू

ये कैसा फैशन आया है, जिसको देखो उसी ने टैटू गुदवाया है जिसकी हड्डियों पे माँस नहीं है उसने नरसिम्हा का टैटू बनवाया है

बेखौफ सोच – सुभाष चंद्र (रविंद्रनाथ टैगोर की चित्त जहां...

हरियाणवी अनुवाद जडै सोच हो बेखौफ, स्वाभिमान हो जड़ै, जडैं ज्ञान हो आजाद, घर-आंगण में संकीर्ण भीत ना खड़ै जड़ै ना बंडै धरती हररोज छोट-छोटे टुकड़्यां टुकड़्यां म्हं ...

कब तक कैद

कविता इन ऊंची इमारतों में उन मोटी दीवारों में कब तक रखोगे कैद उन्हें जो जानती है दीवारों में कैद करने वालों को स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (जुलाई-अगस्त 2016)...

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टैटू

ये कैसा फैशन आया है, जिसको देखो उसी ने टैटू गुदवाया है जिसकी हड्डियों पे माँस नहीं है उसने नरसिम्हा का टैटू बनवाया है

बेखौफ सोच – सुभाष चंद्र (रविंद्रनाथ टैगोर की चित्त जहां...

हरियाणवी अनुवाद जडै सोच हो बेखौफ, स्वाभिमान हो जड़ै, जडैं ज्ञान हो आजाद, घर-आंगण में संकीर्ण भीत ना खड़ै जड़ै ना बंडै धरती हररोज छोट-छोटे टुकड़्यां टुकड़्यां म्हं ...

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