काव्य-गोष्ठी का आयोजन

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अरुण कैहरबा

राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इंद्री के प्रांगण में 28 अक्तूबर 2018 को सृजन मंच इन्द्री के तत्वावधान में देस हरियाणा काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के कवियों ने अपनी रचनाओं में पर्यावरण सरंक्षण, मानवता, समाज सुधार एवं हरियाणा की संस्कृति सहित विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। गोष्ठी की अध्यक्षता कवि मुकेश खंडवाल ने की और संयोजन कवि नरेश मीत व दयाल चंद जास्ट ने किया। कव्य गोष्ठी का संचालन अरुण कुमार कैहरबा ने किया।

वरिष्ठ कवि दयाल चंद जास्ट ने कव्य गोष्ठी की शुरुआत करते हुए अपनी कविता में कुछ यूं कहा-

दिवारों पर लिखे संदेश गलियों से गंद कब उठाते हैं,
अखबारों में छपे हुए लेख दिलों से नफरत कब मिटाते हैं।

नरेश कुमार मीत ने गहरे अहसास की अपनी गजल पढ़ते हुए कहा-

महक महक सा अपना घर लगता है,
बेवक्त की बहार से डर लगता है।
तुम्हीं कहो कैसे फूलों पर करूं ऐतबार,
खुश्बुओं में घुला हुआ जहर लगता है।

कवि अरुण कैहरबा ने जातीय संकीर्णताओं पर तंज कसते हुए अपनी हरियाणवी रचना में कहा –

जात-पात बिन बात करैं ना ऐसे झंडेबाज होये,
ऊंच-नीच नै इब भी मान्नैं, ऐसे हम आजाद होये।

कवि रोशन दीन नंदी ने अपनी कविता में मोबाइल क गुण-दोष का चित्र उकरते हुए कहा

सांईंस और तरक्की के युग में अपनी पहचान बनाई मोबाइल ने,
चारों तरफ खुशी और गम की लहर दिखाई मोबाइल ने।

कवयित्री अंजली तुसंग ने कहा

लड़ना है गर तुम्हें तो न्याय के लिए लड़ो,
कायरों की तरह फालतू पंगे में  ना पड़ो।

गोष्ठी के अध्यक्ष मुकेश खंडवाल ने अपनी कामनाओं को कविता में कुछ यूं पिरोया –

मैं  पढूं कई कलाम और सुने सारी अवाम
तो क्या बात हो,

सलिन्द्र अभिलाषी ने कविता की ताकत को ऐसे बयां किया-

लड़ने को इस जीवन से हथियार कविता है अपनी,
करने को कुछ कर यहां औजार कविता है अपनी।

कवि देवीशरण ने कहा

अविवेक की तंद्रा त्याग, सूने जग को हर्षाना है,
इस धरा को स्वर्ग बनाना है।

रिपोर्ट—अरुण कैहरबा

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