लेके रहेंगे-लेके रहेगे

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एक बै जागरूक माच्छरां नै मिलकै एक सभा बुलाई-उनका नेता बोल्या-भाईयो! ‘हमारे साथ बड़ी बेइन्साफी हो रही है-जुल्म ढाए जा रहे हैं। देखो-साबुन के लिए साबुणदानी, मसालों के लिए मसालादानी’ चूहों के लिए चूहेदानी-परन्तु हमारी माच्छरदानी पर तो माणसां नै कब्जा कर राख्या सै। साथियो-उठो और कसम खाओ-माच्छरदानी में रहणे का हक लेकर रहांगे’ सभी श्रोता मच्छर भी नारे लगाने लगे-‘लेके रहेंगे-लेके रहेगे’।

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