कविता


हमने चाहा था
कमल पुष्पदल खिलें
हमारे देश के आंगन में।
कमल खिल सकें
हमने इसके लिए दलदल रचे
दिल्ली से लेकर
दिलों तक।
पर यह हमारी भूल थी
या स्वार्थ था
कि हमारा हर दल
दलदल फैलाता गया
और पुष्प के बीज डालना
हम भूल गए।

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (सितम्बर-अक्तूबर, 2016) पेज-34

 

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